उत्तराखंड में बारिश और भूस्खलन से हालात अब भी सामान्य नहीं हो पाए हैं। पर्वतीय जिलों में राष्ट्रीय राजमार्ग लगातार बाधित हो रहे हैं। यमुनोत्री हाईवे भूस्खलन के कारण लगातार 12वें दिन भी बंद पड़ा है, वहीं बदरीनाथ हाईवे पर जगह-जगह गिरे मलबे ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
यमुनोत्री हाईवे बंद, यात्री फंसे
उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री हाईवे भूस्खलन की चपेट में आने के बाद से अब तक दुरुस्त नहीं हो पाया है। रास्ता बंद होने से हजारों यात्री और स्थानीय लोग परेशान हैं। आसपास के कस्बों और गांवों में फंसे लोगों को पैदल ही लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। सड़क बहाल करने के लिए लगातार जेसीबी और मशीनें लगाई गई हैं, लेकिन लगातार हो रहे भूस्खलन से राहत नहीं मिल रही है।
दरारों से दहशत
भूस्खलन से प्रभावित इलाकों में मकानों और होटलों में दरारें उभर आई हैं। यमुनोत्री धाम जाने वाले मार्ग पर बसे कई गांवों और बाजारों में दीवारें और फर्श फटने से लोग दहशत में हैं। कई परिवारों ने सुरक्षा की दृष्टि से अपने घर छोड़ने शुरू कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया तो हालात और भयावह हो सकते हैं।
बदरीनाथ हाईवे पर संकट
इधर, चमोली जिले में बदरीनाथ हाईवे पर कई जगह पहाड़ों से मलबा और पत्थर गिरने से यातायात बार-बार बाधित हो रहा है। जोशीमठ और पीपलकोटी के बीच हाईवे कई घंटों तक ठप रहने से तीर्थयात्री और स्थानीय लोग फंसे रहे। सड़क पर जमा मलबा हटाने का काम दिन-रात जारी है, लेकिन पहाड़ों से लगातार गिर रहे पत्थर चुनौती बने हुए हैं।
प्रशासन और राहत कार्य
जिलाधिकारी और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें लगातार हालात की निगरानी कर रही हैं। लोक निर्माण विभाग और बीआरओ की मशीनें सड़कों से मलबा हटाने में जुटी हुई हैं। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे बिना आधिकारिक सूचना के यात्रा पर न निकलें। साथ ही स्थानीय लोगों को सतर्क रहने और खतरे वाले मकानों को खाली करने के निर्देश दिए गए हैं।
यात्रियों की परेशानी
यात्रियों को न केवल सड़क बंद होने से दिक्कत हो रही है, बल्कि होटलों और दुकानों के बंद होने से खाने-पीने और रहने की भी समस्या खड़ी हो गई है। चारधाम यात्रा पर आए श्रद्धालु लगातार इंतजार में हैं कि रास्ते कब तक बहाल होंगे।
निष्कर्ष
लगातार भूस्खलन से बाधित हो रहे यमुनोत्री और बदरीनाथ हाईवे उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन की सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं। सड़कें कब तक दुरुस्त होंगी, इसका फिलहाल कोई स्पष्ट अनुमान नहीं है। ऐसे में प्रशासन और यात्रियों दोनों के लिए इंतजार और सतर्कता ही एकमात्र उपाय है।





