अदन/रियाद: यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार में गहराते मतभेदों के बाद प्रधानमंत्री सलेम बिन ब्राइक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यमन की सरकारी समाचार एजेंसी ‘सबा’ (Saba) के अनुसार, सऊदी समर्थित प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल ने इस इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है। उनके स्थान पर वर्तमान विदेश मंत्री शाया मोहसिन जिंदानी (Shaya Mohsen Zindani) को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। जिंदानी को तत्काल प्रभाव से नई सरकार (कैबिनेट) के गठन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब यमन के दक्षिणी हिस्सों पर नियंत्रण को लेकर सऊदी अरब और UAE के बीच कूटनीतिक और सैन्य खींचतान चरम पर है।
कौन हैं नए प्रधानमंत्री शाया मोहसिन जिंदानी?
जिंदानी को एक अनुभवी राजनयिक और सुलझे हुए राजनेता के रूप में जाना जाता है:
- अनुभवी राजनयिक: प्रधानमंत्री नियुक्त होने से पहले वे यमन के विदेश मंत्री के रूप में कार्यरत थे और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यमन का पक्ष मजबूती से रखते रहे हैं।
- सऊदी अरब में राजदूत: वे सऊदी अरब में यमन के राजदूत भी रह चुके हैं, जिससे माना जा रहा है कि उनकी नियुक्ति से सऊदी अरब के साथ संबंधों में और अधिक समन्वय आएगा।
- चुनौतीपूर्ण कार्यकाल: उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती बिखरी हुई सरकार को एकजुट करना और चरमराई हुई अर्थव्यवस्था को संभालना है।
इस्तीफे के पीछे का मुख्य कारण: सऊदी-UAE ‘ट्रेड वॉर’ और क्षेत्रीय तनाव
सलेम बिन ब्राइक का इस्तीफा यमन के भीतर चल रहे सत्ता संघर्ष का परिणाम माना जा रहा है:
- दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद (STC) का प्रभाव: दिसंबर 2025 के अंत में, UAE समर्थित अलगाववादी समूह ‘STC’ ने दक्षिणी यमन के प्रमुख हिस्सों (हद्रमौत और अल-महरा) पर कब्जा कर लिया था। यह क्षेत्र सऊदी अरब की सीमा के करीब है, जिसे सऊदी ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना।
- सऊदी की जवाबी कार्रवाई: सऊदी अरब ने STC के ठिकानों पर हवाई हमले किए और उन्हें पीछे हटने पर मजबूर किया। इस सैन्य टकराव ने सऊदी और UAE के बीच के दरार को सार्वजनिक कर दिया।
- आंतरिक कलह: सलेम बिन ब्राइक पर आरोप थे कि वे प्रशासनिक सुधारों और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में विफल रहे, जिसके कारण काउंसिल के सदस्यों के साथ उनका तालमेल बिगड़ गया था।
यमन सरकार में अन्य महत्वपूर्ण बदलाव
काउंसिल ने केवल प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य प्रमुख पदों पर भी नियुक्तियां की हैं:
- सलेम बिन ब्राइक की नई भूमिका: पूर्व प्रधानमंत्री को अब PLC प्रमुख रशाद अल-अलीमी का वित्तीय और आर्थिक सलाहकार नियुक्त किया गया है।
- नए काउंसिल सदस्य: पूर्व रक्षा मंत्री महमूद अल-सुबैही और हद्रमौत के गवर्नर सलेम अल-खानबशी को परिषद में शामिल किया गया है। इन्होंने उन दो सदस्यों की जगह ली है जिन्हें UAE समर्थित STC के साथ संबंधों के कारण बर्खास्त कर दिया गया था।
यमन में चल रहे इस सत्ता परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी नजर बना रखी है। विशेषज्ञों का मानना है कि शाया मोहसिन जिंदानी की नियुक्ति का उद्देश्य यमन की सरकार के भीतर बढ़ती गुटबाजी को रोकना और सऊदी अरब के प्रभाव को फिर से स्थापित करना है। हालांकि, हूती विद्रोहियों के साथ जारी युद्ध और दक्षिण में अलगाववादी भावनाओं के बीच, नई सरकार के लिए शांति बहाली की राह अभी भी कांटों भरी है।





