Sunday, November 30, 2025

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यमन पर इस्राइली हमले से तनाव गहराया, हूती विद्रोहियों ने दी चुनौती

सना/यरुशलम। यमन में हूती विद्रोहियों और इस्राइल के बीच टकराव और गहराता जा रहा है। ताज़ा घटनाक्रम में इस्राइल ने मंगलवार को हुदेदा बंदरगाह पर बड़ा हमला किया। इस्राइली सेना का दावा है कि उसने वहां हूती विद्रोहियों के “सैन्य ढांचे” को निशाना बनाया, जिसे ईरान से हथियारों की आपूर्ति और इस्राइल सहित उसके सहयोगियों पर हमले की योजना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।

हूती विद्रोहियों का पलटवार दावा

हूती प्रवक्ता यहया सारी ने कहा कि उनकी वायु-रक्षा प्रणाली ने इस्राइली विमानों को चुनौती दी और कुछ को यमन की वायुसीमा से पीछे हटना पड़ा। हालांकि, इस्राइल का कहना है कि उसने सफलतापूर्वक कई ठिकानों को ध्वस्त किया है।

पिछले हमलों की पृष्ठभूमि

इस हमले का समय भी संवेदनशील है। बीते हफ्ते सना में इस्राइली हमले में 31 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें आम नागरिक और पत्रकार भी शामिल थे। उस हमले में सैन्य मुख्यालय, ईंधन स्टेशन, आवासीय इलाकों, राष्ट्रीय संग्रहालय और जव्फ प्रांत की राजधानी हज्म के सरकारी भवनों को भारी नुकसान पहुंचा था। मंगलवार को हुआ बंदरगाह हमला उन लोगों के अंतिम संस्कार के बीच हुआ, जिनकी मौत पिछले हफ्ते हुई थी। बारिश के बीच अल-मसीरा टीवी ने शवयात्रा और नमाज-ए-जनाजा की तस्वीरें प्रसारित कीं।

ड्रोन हमले के बाद बढ़ा तनाव

हूती विद्रोहियों ने हाल ही में इस्राइल की ओर एक ड्रोन भेजा था, जो दक्षिणी हिस्से में एक हवाई अड्डे से टकराया। इसमें एक व्यक्ति घायल हुआ और आसपास की इमारतों को नुकसान पहुंचा। इस घटना के बाद इस्राइल ने पलटवार करते हुए हूती विद्रोहियों के खुफिया केंद्र, ईंधन भंडार और मीडिया प्रचार विभाग पर सटीक हमले किए।

हूती विद्रोहियों का तर्क

हूती विद्रोही बीते दो वर्षों से इस्राइल और उसके सहयोगियों को मिसाइल व ड्रोन से निशाना बना रहे हैं। उनका कहना है कि गाजा पट्टी में फिलिस्तीनियों के खिलाफ इस्राइली हमलों और दमन की कार्रवाई के विरोध में वे यह अभियान चला रहे हैं। साथ ही, उन्होंने लाल सागर में कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों को भी निशाना बनाया है।

पत्रकारों पर मंडराता खतरा

सना में हुए हालिया हमलों में पत्रकारों की मौत ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों को चिंता में डाल दिया है। ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ)’ ने कहा कि हूती नियंत्रित इलाकों में सूचना साझा करने पर पाबंदी है, जिससे घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि मुश्किल हो रही है। वहीं, ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ ने बताया कि हमलों में मीडिया केंद्रों और अखबारों के दफ्तरों को नुकसान हुआ है। यमन में पत्रकारों के लिए हालात लगातार और खतरनाक बनते जा रहे हैं।

लगातार बढ़ते हमलों और जवाबी कार्रवाइयों से यह साफ है कि यमन में हालात और ज्यादा विस्फोटक हो सकते हैं, जिसका असर पूरे मध्य-पूर्व पर पड़ना तय है।

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