वॉशिंगटन/न्यूयॉर्क: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया भर के संघर्षों में अपनी भूमिका को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने हालिया बयान में कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान दुनिया के कम से कम आठ संभावित युद्धों को रुकवाया है और इस आधार पर नोबेल शांति पुरस्कार उन्हें ही मिलना चाहिए। इस दौरान ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की अपनी पुरानी पेशकश का जिक्र करते हुए एक बार फिर दोनों देशों के बीच के तनाव पर ‘राग’ अलापा है।
‘दुनिया को युद्ध से बचाया, लेकिन सम्मान नहीं मिला’: ट्रंप
ट्रंप ने एक संबोधन के दौरान वैश्विक शांति के क्षेत्र में अपने कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके पास वह क्षमता है जो किसी अन्य विश्व नेता के पास नहीं है।
- दावे की फेहरिस्त: ट्रंप ने दावा किया कि उत्तर कोरिया के साथ परमाणु युद्ध का खतरा हो या मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में तनाव, उन्होंने अपनी ‘डील मेकिंग’ कला से भीषण संघर्षों को टाला है।
- नोबेल पुरस्कार पर तंज: उन्होंने नोबेल समिति की आलोचना करते हुए कहा कि वे उन लोगों को पुरस्कार देते हैं जो कुछ नहीं करते, जबकि उनके जैसे व्यक्ति को नजरअंदाज किया जा रहा है जिसने वास्तव में शांति स्थापित की है।
भारत और पाकिस्तान पर फिर की टिप्पणी
भारत और पाकिस्तान के रिश्तों पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने दोनों देशों के बीच “एक बहुत ही विस्फोटक स्थिति” को शांत करने में मदद की है।
- मध्यस्थता की जिद: ट्रंप ने दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के नेतृत्व के साथ उनके अच्छे संबंध हैं और वे अभी भी दोनों देशों के बीच कश्मीर जैसे जटिल मुद्दों पर मध्यस्थ (Mediator) बनने के लिए तैयार हैं।
- पुरानी स्थिति की याद: उल्लेखनीय है कि भारत हमेशा से यह कहता रहा है कि कश्मीर एक द्विपक्षीय मुद्दा है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की दखलंदाजी की जरूरत नहीं है, लेकिन ट्रंप बार-बार इस मुद्दे को उठाकर सुर्खियां बटोरते रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर प्रतिक्रिया
ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।
- विरोधियों का तर्क: आलोचकों का कहना है कि ट्रंप द्वारा ‘8 युद्ध रुकवाने’ का दावा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है और उनके कार्यकाल में कई अंतरराष्ट्रीय समझौतों (जैसे ईरान न्यूक्लियर डील) से अमेरिका के बाहर निकलने से अस्थिरता बढ़ी थी।
- समर्थकों का रुख: ट्रंप के समर्थकों का मानना है कि ‘अब्राहम समझौते’ (Abraham Accords) के जरिए इजरायल और अरब देशों के बीच संबंध सुधारना उनकी एक बड़ी उपलब्धि थी, जिसके लिए उन्हें सम्मान मिलना ही चाहिए।
निष्कर्ष: ट्रंप की ‘शांति’ नीति और भविष्य
ट्रंप का यह बयान उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और आगामी चुनाव प्रचार के केंद्र में रहने की उनकी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। भारत के संदर्भ में उनके इस बयान को कूटनीतिज्ञ एक राजनीतिक स्टंट मान रहे हैं, क्योंकि भारत अपनी संप्रभुता और द्विपक्षीय बातचीत के रुख पर हमेशा से अडिग रहा है।





