Wednesday, February 25, 2026

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‘मेरे बिना शहबाज शरीफ का बचना नामुमकिन था’: डोनाल्ड ट्रंप का ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर बड़ा दावा; बोले— मैंने बचाई पाकिस्तानी पीएम की जान

वॉशिंगटन/इस्लामाबाद: दुनिया की राजनीति में अपने बेबाक बयानों के लिए मशहूर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर एक बड़ा दावा कर वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने हाल ही में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए कहा है कि अगर वे हस्तक्षेप नहीं करते, तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ आज जीवित नहीं होते। ट्रंप के इस दावे ने न केवल पाकिस्तान बल्कि अंतरराष्ट्रीय रक्षा गलियारों में भी हड़कंप मचा दिया है। इस बयान के बाद अब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के पीछे की कूटनीतिक कड़ियों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

ट्रंप का सनसनीखेज खुलासा: “मैं नहीं होता, तो वे मारे जाते”

एक निजी चैनल को दिए साक्षात्कार में डोनाल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन की संवेदनशीलता पर प्रकाश डाला:

  • निर्णायक भूमिका: ट्रंप ने दावा किया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान स्थितियां इतनी विकट हो गई थीं कि शहबाज शरीफ की सुरक्षा पूरी तरह खतरे में थी। ट्रंप के अनुसार, उनके व्यक्तिगत हस्तक्षेप और समय पर लिए गए फैसलों की वजह से ही पाकिस्तानी पीएम की जान बच सकी।
  • इंटेलिजेंस इनपुट: उन्होंने संकेत दिया कि उनके पास कुछ ऐसे खुफिया इनपुट्स थे, जिन्हें उन्होंने साझा किया, जिससे एक बड़ा ‘तख्तापलट’ या ‘घातक हमला’ टल गया।
  • पाकिस्तान की चुप्पी: ट्रंप के इस बयान पर फिलहाल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) या वहां की सेना की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

क्या है ‘ऑपरेशन सिंदूर’?

हालांकि इस ऑपरेशन की आधिकारिक जानकारी बेहद गोपनीय रखी गई है, लेकिन सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार:

  1. आतंकवाद विरोधी अभियान: माना जा रहा है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ एक उच्च-स्तरीय आतंकवाद विरोधी या सीमा पार सुरक्षा से जुड़ा गुप्त मिशन था, जिसमें कई देशों की एजेंसियां शामिल थीं।
  2. अस्थिरता को रोकना: कुछ सूत्रों का दावा है कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य दक्षिण एशिया में एक बड़े राजनीतिक अस्थिरता के प्रयास को विफल करना था।
  3. ट्रंप का प्रभाव: ट्रंप का यह दावा दर्शाता है कि उनके कार्यकाल (या अनौपचारिक प्रभाव) के दौरान अमेरिकी खुफिया तंत्र पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा में कितनी गहरी पैठ रखता था।

वैश्विक राजनीति पर असर और प्रतिक्रियाएं

ट्रंप के इस बयान ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं:

  • कूटनीतिक दबाव: विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप इस तरह के दावे कर यह जताना चाहते हैं कि पाकिस्तान की सत्ता पर पकड़ बनाए रखने के लिए अमेरिका (विशेषकर ट्रंप) का समर्थन कितना अनिवार्य है।
  • विपक्ष का हमला: पाकिस्तान में विपक्षी दल इस बयान को शहबाज शरीफ सरकार की कमजोरी के रूप में पेश कर रहे हैं, जो अपनी सुरक्षा के लिए भी विदेशी ताकतों पर निर्भर है।
  • अमेरिका-पाक संबंध: यह खुलासा ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान और अमेरिका के संबंधों में पहले से ही काफी उतार-चढ़ाव देखे जा रहे हैं।

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