मेरठ/रुद्रपुर: एनसीईआरटी (NCERT) की फर्जी किताबों के अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैले अवैध कारोबार में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। उत्तराखंड पुलिस की विशेष जांच दल (SIT) द्वारा हिरासत में लिए गए अभियुक्त विशाल ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया है कि इन नकली किताबों की छपाई का मुख्य केंद्र कहीं और नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश का मेरठ शहर ही था। इस खुलासे के बाद अब पुलिस की टीमें मेरठ के उन प्रिंटिंग प्रेसों को चिन्हित करने में जुट गई हैं जहाँ से यह काला कारोबार संचालित हो रहा था।
सिंडिकेट का पर्दाफाश: मेरठ से जुड़ा नेटवर्क
ऊधम सिंह नगर की एसआईटी टीम ने मेरठ में दबिश देकर विशाल को हिरासत में लिया था, जिसके बाद कई दौर की गहन पूछताछ में इस पूरे सिंडिकेट का कच्चा चिट्ठा सामने आया। विशाल ने पुलिस को बताया कि इस गिरोह का मास्टरमाइंड संदीप गुप्ता है, जो मेरठ में ही बड़े पैमाने पर फर्जी एनसीईआरटी किताबें छपवाने का काम करता था। उल्लेखनीय है कि मेरठ में पहले भी फर्जीवाड़े के मामले उजागर होने के बाद कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए इस गिरोह ने अपना सुरक्षित ठिकाना उत्तराखंड के रुद्रपुर में स्थानांतरित कर लिया था।
रुद्रपुर में ट्रांजिट हब और 10 लाख किताबों का जखीरा
जांच में सामने आया है कि गिरोह ने रुद्रपुर के कीरतपुर इलाके में एक विशाल गोदाम किराए पर लिया था। मेरठ की प्रिंटिंग प्रेसों में छपने वाली किताबों को बड़े कैंटरों के जरिए रुद्रपुर पहुँचाया जाता था। यहाँ से इन किताबों को उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल सहित उत्तर प्रदेश और अन्य पड़ोसी राज्यों के बाजारों में खपाया जाता था। पुलिस इस मामले में पहले ही लगभग 10 लाख फर्जी किताबों का भारी स्टॉक बरामद कर चुकी है, जिसकी प्रमाणिकता की पुष्टि दिल्ली से आए एनसीईआरटी के विशेषज्ञों ने भी की है।
फरार आरोपियों की तलाश और कानूनी कार्रवाई
एसआईटी अब उन विशिष्ट प्रिंटिंग प्रेसों की तलाश कर रही है जहाँ इन किताबों की छपाई की जा रही थी। साथ ही, गिरोह के मुख्य सूत्रधार संदीप गुप्ता और उसके सहयोगी शाहरुख की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, अभियुक्त विशाल के बयानों को जल्द ही मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराया जाएगा ताकि मामले में पुख्ता साक्ष्य जुटाए जा सकें।
रडार पर अन्य बुक सेलर और मार्केटिंग टीम
इस बड़े खुलासे के बाद पुलिस अब उन सभी बुक सेलरों और मार्केटिंग में जुटे युवकों की पहचान करने में जुटी है, जो इस नेटवर्क का हिस्सा थे। पुलिस का मानना है कि इस सिंडिकेट के तार कई राज्यों के बड़े वितरकों से जुड़े हो सकते हैं, जिसका पर्दाफाश होना अभी बाकी है।





