शिलॉन्ग: मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में स्थित एक कोयला खदान में हुए भीषण धमाके ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। बचाव दल द्वारा मलबे से और शव निकाले जाने के बाद इस हादसे में मृतकों की कुल संख्या बढ़कर 30 हो गई है। राज्य सरकार ने घटना की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) के आदेश जारी कर दिए हैं। यह हादसा उस समय हुआ जब खदान के भीतर मजदूर काम कर रहे थे और अचानक एक शक्तिशाली विस्फोट के बाद खदान का बड़ा हिस्सा ढह गया।
हादसे का भीषण रूप: मलबे में दबीं कई जिंदगियां
घटनास्थल पर चल रहे राहत और बचाव कार्यों के बीच स्थिति अत्यंत हृदयविदारक बनी हुई है:
- बढ़ती मौतें: शुरुआत में कम मौतों की आशंका थी, लेकिन जैसे-जैसे बचाव दल खदान की गहराई तक पहुंचा, शवों की संख्या बढ़ती गई। मृतकों में अधिकांश मजदूर पड़ोसी राज्यों और स्थानीय गांवों के बताए जा रहे हैं।
- बचाव कार्य में बाधा: खदान के भीतर जहरीली गैसों के रिसाव और मलबे के अस्थिर होने के कारण एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
- विस्फोट का कारण: शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, खदान के भीतर अवैध रूप से इस्तेमाल किए जा रहे विस्फोटक या मीथेन गैस के जमाव के कारण यह धमाका हुआ हो सकता है।
सरकार की कार्रवाई: न्यायिक जांच का ऐलान
मुख्यमंत्री ने इस त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं:
- रिटायर्ड जज करेंगे जांच: सरकार ने स्पष्ट किया है कि एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में जांच समिति गठित की जाएगी, जो इस बात की जांच करेगी कि प्रतिबंध के बावजूद खनन कैसे हो रहा था।
- लापरवाही पर वार: खदान मालिक और ठेकेदारों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में केस दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। पुलिस यह पता लगा रही है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी के लिए कौन जिम्मेदार है।
- मुआवजे की घोषणा: मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया गया है, हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अवैध खनन को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है।
अवैध ‘रैट-होल’ माइनिंग पर फिर उठे सवाल
यह हादसा एक बार फिर मेघालय में प्रचलित ‘रैट-होल’ माइनिंग (Rat-hole mining) की खतरनाक प्रथा को उजागर करता है:
- एनजीटी का प्रतिबंध: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने राज्य में असुरक्षित कोयला खनन पर पहले ही प्रतिबंध लगा रखा है, लेकिन इसके बावजूद दूर-दराज के इलाकों में अवैध खनन जारी है।
- मानवाधिकार संगठनों का रोष: सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि प्रशासन और राजनेताओं की मिलीभगत से यह जानलेवा खेल चल रहा है, जिसकी कीमत गरीब मजदूरों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है।





