देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर ‘मुस्लिम यूनिवर्सिटी’ का मुद्दा गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक प्रीतम सिंह पंवार ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें खुली चुनौती दी है। पंवार ने तीखे लहजे में कहा कि यदि हरीश रावत उनके द्वारा मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पक्ष में दिए गए किसी भी बयान का प्रमाण पेश कर देते हैं, तो वे तत्काल राजनीति से संन्यास ले लेंगे। इस बयान ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है और आने वाले चुनावों से पहले ध्रुवीकरण की राजनीति को फिर से हवा दे दी है।
विवाद की जड़: क्या है पूरा मामला?
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब कांग्रेस खेमे की ओर से यह संकेत दिया गया कि भाजपा के कुछ नेता भी पूर्व में इस तरह के संस्थानों की पैरवी कर चुके हैं:
- हरीश रावत का घेराव: प्रीतम सिंह ने आरोप लगाया कि हरीश रावत अपनी पुरानी घोषणाओं और तुष्टीकरण की राजनीति से ध्यान भटकाने के लिए अनर्गल आरोप लगा रहे हैं।
- प्रीतम सिंह का पक्ष: पंवार ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी किसी विशेष समुदाय के लिए यूनिवर्सिटी बनाने की मांग नहीं की। उन्होंने इसे कांग्रेस का ‘डर्टी पॉलिटिक्स’ का हिस्सा बताया।
- चुनौती का स्वरूप: भाजपा विधायक ने कहा, “मैं डंके की चोट पर कहता हूँ कि हरीश रावत वह वीडियो या दस्तावेज दिखा दें जिसमें मैंने मुस्लिम यूनिवर्सिटी का समर्थन किया हो, मैं आज ही इस्तीफा दे दूंगा।”
सियासी वार-पलटवार: देवभूमि की राजनीति में उबाल
इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है:
- भाजपा का रुख: सत्ता पक्ष का कहना है कि कांग्रेस ने हमेशा प्रदेश में ‘जनसांख्यिकी बदलाव’ और ‘तुष्टीकरण’ को बढ़ावा दिया है। भाजपा इसे ‘लैंड जिहाद’ और ‘मजहबी अतिक्रमण’ से जोड़कर देख रही है।
- कांग्रेस की दलील: कांग्रेस नेताओं का मानना है कि भाजपा केवल अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए पुराने और बेबुनियाद मुद्दों को हवा दे रही है ताकि जनता का ध्यान मूल मुद्दों से भटकाया जा सके।
- जनता के बीच पैठ: यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब राज्य में सख्त भू-कानून और मूल निवास जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा चल रही है।
मुस्लिम यूनिवर्सिटी: एक पुराना चुनावी मुद्दा
बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान भी ‘मुस्लिम यूनिवर्सिटी’ का मुद्दा काफी उछला था। उस समय एक कांग्रेस नेता के बयान को लेकर काफी बवाल हुआ था, जिसका खामियाजा कांग्रेस को चुनाव परिणामों में भुगतना पड़ा था। अब प्रीतम सिंह पंवार द्वारा दी गई इस खुली चुनौती ने हरीश रावत को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है।





