देहरादून: नए साल के आगमन के अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच एक महत्वपूर्ण शिष्टाचार भेंट हुई। इस मुलाकात के दौरान न केवल नववर्ष की शुभकामनाएं साझा की गईं, बल्कि राज्य के विकास, जनहित की योजनाओं और आगामी लक्ष्यों को लेकर विस्तृत संवाद भी हुआ। दोनों संवैधानिक प्रमुखों ने प्रदेश को प्रगति के पथ पर तेजी से आगे ले जाने का संकल्प दोहराया।
विकास और सुशासन पर चर्चा
राजभवन में आयोजित इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को राज्य सरकार द्वारा पिछले वर्ष हासिल की गई उपलब्धियों से अवगत कराया। संवाद के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:
- इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी: मुख्यमंत्री ने चारधाम ऑल वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन और सीमांत क्षेत्रों में हो रहे सड़क निर्माण की प्रगति की जानकारी दी।
- महिला सशक्तिकरण और रोजगार: राज्य में ‘लखपति दीदी’ योजना और सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए क्षैतिज आरक्षण जैसे कदमों पर चर्चा हुई, जिसे राज्यपाल ने प्रदेश के सामाजिक ढांचे के लिए मील का पत्थर बताया।
- रिवर्स पलायन: पहाड़ों से हो रहे पलायन को रोकने के लिए सीमावर्ती गांवों (Vibrant Villages) के विकास और वहां स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
राज्यपाल का मार्गदर्शन और सराहना
राज्यपाल ने राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड में पर्यटन और आयुर्वेद के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि तकनीकी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाना नए साल की प्राथमिकता होनी चाहिए। राज्यपाल ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि राज्य अब नीतिगत सुधारों के माध्यम से निवेश का केंद्र बन रहा है।
भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी शासन का संकल्प
संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ‘विकल्प रहित संकल्प’ के ध्येय वाक्य पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि नए साल में भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को और अधिक मजबूती से लागू किया जाएगा। प्रदेश की कानून-व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर भी राज्यपाल को आश्वस्त किया गया।
प्रदेशवासियों के लिए साझा संदेश
मुलाकात के अंत में मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने संयुक्त रूप से समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने जनता से अपील की कि उत्तराखंड को ‘अग्रणी राज्य’ बनाने के इस अभियान में हर नागरिक अपना सक्रिय योगदान दे।





