मुंबई: देश की सबसे अमीर महानगरपालिका, बीएमसी (BMC) के चुनाव परिणामों ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर कर दिया है। सभी सीटों के परिणाम घोषित होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के गठबंधन (महायुति) ने पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। दशकों तक बीएमसी पर राज करने वाले उद्धव ठाकरे गुट को इस बार तगड़ा झटका लगा है। वहीं, सबसे चौंकाने वाला परिणाम राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) का रहा, जो इस चुनाव में अपनी छाप छोड़ने में पूरी तरह विफल रही। मनसे का प्रदर्शन इतना खराब रहा कि वह असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM से भी कम सीटें जीतने में सफल हो पाई।
बीएमसी का नया अंकगणित: बहुमत का आंकड़ा पार
मुंबई की सत्ता पर काबिज होने के लिए जरूरी बहुमत के जादुई आंकड़े को महायुति ने आसानी से पार कर लिया है:
- महायुति की बढ़त: भाजपा ने अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने की दिशा में कदम बढ़ाए, जबकि शिंदे गुट ने भी मुंबई के गढ़ों में अपनी पकड़ साबित की।
- विपक्ष की स्थिति: महाविकास अघाड़ी (MVA), विशेषकर उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT), को अपने गढ़ बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा और वे बहुमत के आंकड़े से काफी दूर रह गए।
मनसे की करारी हार: ओवैसी की पार्टी से भी पीछे
इस चुनाव का सबसे बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट’ राज ठाकरे की पार्टी का प्रदर्शन रहा:
- सीटों का गणित: राज ठाकरे की मनसे को मुंबई की जनता ने सिरे से नकार दिया। पार्टी की सीटों की संख्या इकाई अंक तक सिमट गई।
- AIMIM का प्रदर्शन: हैदराबाद स्थित ओवैसी की पार्टी AIMIM ने मुस्लिम बहुल इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करते हुए मनसे से अधिक सीटें जीतकर सबको चौंका दिया।
- वोट बैंक में सेंध: राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मनसे के ‘मराठी मानुस’ और ‘हिंदुत्व’ के वोट बैंक में भाजपा और शिंदे गुट ने बड़ी सेंधमारी की है।
प्रमुख नेताओं की प्रतिक्रिया
- मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे: “यह मुंबई के विकास और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व पर जनता की मुहर है। मुंबई अब भ्रष्टाचार मुक्त होगी।”
- देवेंद्र फडणवीस: “मुंबई की जनता ने विकास को चुना है। भाजपा और शिवसेना (शिंदे) मिलकर मुंबई को विश्वस्तरीय शहर बनाएंगे।”
- उद्धव ठाकरे: “हम जनता के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। हम अपनी गलतियों की समीक्षा करेंगे।”
मुंबई के भविष्य पर असर
बीएमसी पर भाजपा-शिंदे के नियंत्रण के बाद अब शहर के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में तेजी आने की उम्मीद है:
- कोस्टल रोड और मेट्रो: सत्ता परिवर्तन के बाद रुके हुए प्रोजेक्ट्स को गति मिलने की संभावना है।
- बजट का आवंटन: बीएमसी के लगभग 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक के बजट का प्रबंधन अब नई सत्ता के हाथों में होगा, जिससे आने वाले समय में नए प्रशासनिक सुधार देखने को मिल सकते हैं।
निष्कर्ष: बदला हुआ राजनीतिक परिदृश्य
बीएमसी के इन नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मुंबई की जनता ने अब ‘विरासत की राजनीति’ के बजाय ‘सत्ता और विकास’ के साथ चलना स्वीकार किया है। राज ठाकरे के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का विषय है, क्योंकि उनकी पार्टी का ग्राफ लगातार गिर रहा है। वहीं, महायुति के लिए यह जीत आगामी विधानसभा चुनावों के लिए एक मजबूत ‘बूस्टर डोज’ साबित होगी।





