मुंबई: बीएमसी चुनाव के नतीजों में भाजपा और शिंदे गुट के गठबंधन (महायुति) को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद अब असली सस्पेंस ‘मेयर’ की कुर्सी को लेकर शुरू हो गया है। चुनाव परिणामों के तुरंत बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने एक नया ‘ट्विस्ट’ लाते हुए मुंबई के मेयर पद पर अपनी दावेदारी ठोक दी है। शिंदे गुट के वरिष्ठ नेताओं ने मांग की है कि चूंकि मुंबई की राजनीति का मूल आधार ‘शिवसेना’ रही है, इसलिए पहले ढाई साल के लिए मेयर उनकी पार्टी का होना चाहिए। इस मांग ने भाजपा नेतृत्व को सोच में डाल दिया है, क्योंकि भाजपा इस बार सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है और वह अपने ही मेयर की ताजपोशी की तैयारी कर रही थी।
क्या है शिंदे गुट का नया ‘ट्विस्ट’ और तर्क?
शिंदे सेना के सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने गठबंधन धर्म का हवाला देते हुए निम्नलिखित प्रस्ताव सामने रखे हैं:
- ‘ढाई-ढाई साल’ का फॉर्मूला: शिंदे गुट का प्रस्ताव है कि 5 साल के कार्यकाल में से पहले ढाई साल शिवसेना (शिंदे) का मेयर रहे और अगले ढाई साल भाजपा का।
- अस्तित्व की लड़ाई: पार्टी के रणनीतिकारों का तर्क है कि अगर मुंबई जैसे महत्वपूर्ण शहर में शिवसेना का मेयर नहीं रहता है, तो इसका गलत संदेश जमीनी स्तर के शिवसैनिकों और कार्यकर्ताओं के बीच जाएगा, जिससे उद्धव गुट को मनोवैज्ञानिक बढ़त मिल सकती है।
- क्षेत्रीय समीकरण: शिंदे गुट का दावा है कि उन्होंने दक्षिण और मध्य मुंबई के उन इलाकों में जीत हासिल की है जो पारंपरिक रूप से शिवसेना के गढ़ रहे हैं, इसलिए मेयर पद पर उनका हक स्वाभाविक है।
भाजपा की दुविधा और रणनीति
बीएमसी में सबसे ज्यादा सीटें जीतने के बाद भाजपा इस बार किसी भी कीमत पर अपना मेयर बनाने की योजना बना रही थी:
- बड़ी पार्टी होने का दावा: भाजपा के स्थानीय नेताओं का कहना है कि संख्या बल (Numbers) के हिसाब से मेयर पद पर उनका पहला हक है, क्योंकि उन्होंने शिंदे गुट की तुलना में अधिक सीटें जीती हैं।
- हाईकमान का फैसला: सूत्रों की मानें तो अब इस विवाद का हल मुंबई के बजाय दिल्ली या वर्षा बंगले (मुख्यमंत्री आवास) पर होने वाली शीर्ष स्तर की बैठकों में निकलेगा। देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के बीच इस पर गहन चर्चा होने की उम्मीद है।
- उप-महापौर का विकल्प: चर्चा यह भी है कि भाजपा मेयर का पद अपने पास रखकर शिंदे गुट को उप-महापौर (Deputy Mayor) और महत्वपूर्ण ‘स्थायी समिति’ (Standing Committee) का अध्यक्ष पद देने का प्रस्ताव दे सकती है।
उद्धव गुट और विपक्ष की नजर
सत्ताधारी गठबंधन के भीतर शुरू हुई इस खींचतान पर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) ने चुटकी ली है। विपक्ष का कहना है कि यह लड़ाई विकास के लिए नहीं, बल्कि केवल मलाईदार पदों और मुंबई के खजाने पर कब्जे के लिए है। राजनैतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मेयर पद पर सहमति नहीं बनी, तो इसका असर भविष्य में होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार और आपसी तालमेल पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल, गेंद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पाले में है। शिंदे गुट की इस नई मांग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे गठबंधन में ‘जूनियर पार्टनर’ बनकर रहने को तैयार नहीं हैं। आने वाले 24 से 48 घंटे मुंबई की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इसी दौरान तय होगा कि देश की सबसे शक्तिशाली महानगरपालिका की कमान किसके हाथ में होगी।





