मुंबई: मुंबई के अरब सागर स्थित विश्व प्रसिद्ध हाजी अली दरगाह जल्द ही एक नए ऐतिहासिक गौरव का केंद्र बनने जा रही है। दरगाह ट्रस्ट ने इस पवित्र स्थल पर दुनिया का सबसे ऊंचा भारतीय राष्ट्रीय ध्वज लगाने की योजना बनाई है। दरगाह के ट्रस्टी सुहैल खंडवानी ने रविवार को इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जानकारी देते हुए बताया कि इसके लिए महाराष्ट्र सरकार को औपचारिक प्रस्ताव भेज दिया गया है।
सांप्रदायिक सद्भाव और देशभक्ति का संगम
ट्रस्टी सुहैल खंडवानी ने इस पहल के पीछे के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए इसे एकता का प्रतीक बताया:
- साझी पहचान का निशान: दरगाह ट्रस्ट का मानना है कि यह तिरंगा देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और भारत की साझी पहचान का एक महत्वपूर्ण चिह्न बनेगा।
- सद्भाव की मिसाल: खंडवानी के अनुसार, 15वीं सदी के सूफी संत पीर हाजी अली शाह बुखारी की यह आरामगाह सदियों से विश्वास और सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल रही है।
- ऐतिहासिक महत्व: भारतीय इतिहास में अहम स्थान रखने वाली यह दरगाह आज भी ‘सबको साथ लेकर चलने’ के दर्शन को जीवंत रखे हुए है।
दरगाह की भौगोलिक स्थिति और महत्व
हाजी अली दरगाह न केवल धार्मिक बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी मुंबई का एक प्रमुख केंद्र है:
- टापू पर स्थित: यह दरगाह वर्ली तट से लगभग 500 मीटर दूर समुद्र के बीच एक छोटे से टापू पर स्थित है।
- श्रद्धालुओं की भारी भीड़: देश की सबसे खास आध्यात्मिक जगहों में शुमार इस दरगाह पर हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक मत्था टेकने पहुँचते हैं।
नया कीर्तिमान: सरकार से अनुमति मिलने के बाद, इसी छोटे टापू पर दुनिया का सबसे ऊंचा राष्ट्रीय झंडा स्थापित किया जाएगा।





