श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ की दिशा में एक और बड़ी और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है। सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में आयोजित किए गए दूसरे इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-02) के सफल समापन के बाद भारत ने अंतरिक्ष यात्रियों को धरती पर सुरक्षित वापस लाने की अपनी तकनीक का लोहा मनवा लिया है। केंद्रीय अंतरिक्ष मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस ऐतिहासिक परीक्षण की सफलता पर इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि यह मिशन भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के नए शिखर पर ले जाएगा।
क्या है IADT? अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा का ‘कवच’
इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट गगनयान मिशन का वह महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो अंतरिक्ष यात्रियों की जान बचाने और उनकी सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है।
- पैराशूट प्रणाली का परीक्षण: जब अंतरिक्ष यात्री अपना मिशन पूरा कर वापस लौटेंगे, तो उनका क्रू मॉड्यूल बेहद तेज गति से वायुमंडल में प्रवेश करेगा। इस गति को कम करने के लिए पैराशूट का सही समय पर और सही क्रम में खुलना अनिवार्य है।
- परीक्षण की प्रक्रिया: इस टेस्ट के दौरान एक डमी क्रू मॉड्यूल को भारतीय वायुसेना के विमान के जरिए ऊँचाई से गिराया गया। हवा में गिरते समय पैराशूट्स ने योजना के अनुसार काम किया और मॉड्यूल की रफ्तार को नियंत्रित करते हुए उसे सुरक्षित रूप से उतारा। यह सफलता साबित करती है कि इसरो का ‘रिकवरी सिस्टम’ पूरी तरह से विश्वसनीय है।
गगनयान मिशन: एक नजर में
यह भारत का पहला ऐसा अंतरिक्ष कार्यक्रम है जिसके तहत भारतीय नागरिकों को भारतीय रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।
- मिशन का लक्ष्य: इसरो का उद्देश्य 3 अंतरिक्ष यात्रियों (गगनयात्रियों) को पृथ्वी की निचली कक्षा (400 किमी की ऊँचाई) में भेजना है, जहाँ वे लगभग 3 दिनों तक शोध कार्य करेंगे।
- अंतिम चरण की तैयारी: फिलहाल मानवरहित (Unmanned) परीक्षणों का दौर चल रहा है। इन परीक्षणों की सफलता के बाद, 2027 की शुरुआत में पहला मानवयुक्त मिशन अंतरिक्ष में भेजे जाने की संभावना है।
मिशन का वैश्विक महत्व: भारत बनेगा ‘चौथी महाशक्ति’
गगनयान की सफलता के साथ ही भारत अंतरिक्ष विज्ञान के उन चुनिंदा क्लब में शामिल हो जाएगा, जिनके पास मानव को अंतरिक्ष में भेजने की स्वदेशी क्षमता है।
- प्रतिष्ठित सूची: अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ही इस मुकाम को हासिल कर पाए हैं। भारत इस सूची में शामिल होने वाला चौथा देश बनेगा।
- तकनीकी आत्मनिर्भरता: यह मिशन भारत की तकनीकी संप्रभुता और ‘मेक इन इंडिया’ की ताकत को पूरी दुनिया के सामने प्रदर्शित करेगा।
भारत के ‘अंतरिक्ष रत्न’: मिशन के लिए चुने गए जांबाज
गगनयान मिशन के लिए भारतीय वायुसेना के चार अनुभवी पायलटों को चुना गया है, जो विशेष अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं:
- प्रशांत बालकृष्णन नायर
- अजीत कृष्णन
- अंगद प्रताप
- शुभांशु शुक्ला





