देहरादून: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध और मिसाइल हमलों की गूँज अब उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भी सुनाई दे रही है। कुवैत में एक निजी कंपनी में कार्यरत देहरादून निवासी प्रीतम सिंह हाल ही में किसी तरह जान बचाकर सुरक्षित अपने घर लौटे हैं। दून पहुँचते ही प्रीतम ने कुवैत में हुए हालिया धमाकों और वहां व्याप्त दहशत का जो मंजर बयां किया, उसने परिजनों सहित पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। प्रीतम के अनुसार, वहां स्थिति इतनी भयावह है कि लोग अपनों की सलामती के लिए बंकरों और सुरक्षित ठिकानों में दुबकने को मजबूर हैं।
आंखों देखा हाल: “वो रात कयामत जैसी थी”
प्रीतम ने कुवैत के औद्योगिक क्षेत्र में हुए धमाकों का विवरण देते हुए बताया:
- अचानक हुए हमले: प्रीतम ने बताया कि रात के समय अचानक आसमान में तेज रोशनी हुई और देखते ही देखते कई शक्तिशाली धमाकों से धरती डोल गई। हमला इतना सटीक था कि पास की एक रिफाइनरी और गोदाम को भारी नुकसान पहुँचा।
- मिसाइलों की गड़गड़ाहट: “हमें लगा जैसे आसमान फट गया हो। मिसाइलें हमारे सिर के ऊपर से गुजर रही थीं और इजरायल के डिफेंस सिस्टम उन्हें हवा में ही नष्ट कर रहे थे, जिससे मलबा हमारे रिहायशी इलाकों में गिर रहा था,” प्रीतम ने डबडबाई आँखों से बताया।
- अफरा-तफरी का माहौल: धमाकों के बाद पूरे शहर में सायरन बजने लगे। लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। संचार सेवाएं बाधित होने के कारण अपनों से संपर्क करना भी मुश्किल हो गया था।
कुवैत में भारतीय समुदाय का हाल: दहशत के साये में जिंदगी
प्रीतम के मुताबिक, वहां रह रहे हजारों भारतीय श्रमिक और पेशेवर गहरे तनाव में हैं:
- सुरक्षा की चिंता: कई भारतीयों के कार्यस्थल युद्ध क्षेत्र के करीब हैं। हालांकि कुवैत सरकार सुरक्षा का भरोसा दे रही है, लेकिन लगातार होते हवाई हमलों ने डर का माहौल बना दिया है।
- खाने-पीने का संकट: हमलों के बाद कई इलाकों में रसद की आपूर्ति प्रभावित हुई है। सुपरमार्केट में लंबी कतारें लग रही हैं और जरूरी सामान की कीमतें आसमान छू रही हैं।
- वापसी की गुहार: प्रीतम ने बताया कि उनके कई साथी अभी भी वहां फंसे हुए हैं और भारत सरकार से उन्हें सुरक्षित निकालने (Evacuation) की अपील कर रहे हैं।
परिजनों की राहत और सरकार से अपील
प्रीतम की सुरक्षित वापसी पर उनके परिवार ने राहत की सांस ली है, लेकिन अन्य प्रवासियों के लिए वे चिंतित हैं:
- शुक्रगुजार परिवार: प्रीतम की मां ने कहा, “जब तक बेटा घर नहीं आ गया था, हमारी रातों की नींद उड़ गई थी। टीवी पर धमाकों की खबरें देखकर कलेजा मुंह को आता था।”
- प्रशासनिक सक्रियता: प्रीतम ने उत्तराखंड सरकार और केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया जिन्होंने समय पर एडवाइजरी जारी की। उन्होंने मांग की है कि कुवैत और अन्य खाड़ी देशों में फंसे उत्तराखंडियों के लिए एक विशेष चार्टर्ड विमान की व्यवस्था की जाए।





