Saturday, January 3, 2026

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प्रयागराज: तुर्ग्रहीय योग के शुभ संयोग में माघ मेले का आगाज, आस्था की डुबकी लगाने उमड़ा जनसैलाब

प्रयागराज: धर्म, आस्था और अध्यात्म की त्रिवेणी संगम पर आज से विश्व प्रसिद्ध ‘माघ मेला’ का विधिवत शुभारंभ हो गया है। इस वर्ष मेले का आगाज ‘तुर्ग्रहीय योग’ (चार ग्रहों का एक विशेष राशि में संचरण) जैसे दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग में हो रहा है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बावजूद, तड़के सुबह से ही श्रद्धालु संगम तट पर आस्था की डुबकी लगाकर भगवान भास्कर की आराधना कर रहे हैं।

तीर्थराज में गृहस्थों का ‘अध्यात्म की ओर’ प्रस्थान माघ मेले की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘कल्पवास’ है। इस वर्ष बड़ी संख्या में गृहस्थों ने मोह-माया त्याग कर एक महीने तक रेती पर रहकर भजन-पूजन का संकल्प लिया है। संगम किनारे हजारों छोटे-बड़े तंबू कनात (टेंट) तन गए हैं, जहाँ श्रद्धालु सात्विक जीवन व्यतीत करते हुए त्रिकाल स्नान और जप-तप करेंगे। मान्यता है कि माघ के महीने में संगम तट पर निवास करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और ग्रहों के दोषों का निवारण होता है।

ज्योतिषीय महत्व: क्यों खास है तुर्ग्रहीय योग? ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार माघ मेले के प्रारंभ पर ग्रहों की जो स्थिति बन रही है, वह दान-पुण्य के लिए सर्वोत्तम है। ‘तुर्ग्रहीय योग’ के कारण स्नान और दान का महत्व कई गुना बढ़ गया है। यही कारण है कि देश के कोने-कोने से श्रद्धालु न केवल स्नान करने आ रहे हैं, बल्कि तिल, गुड़ और खिचड़ी का दान कर पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।

सुरक्षा और सुविधाओं का चाक-चौबंद घेरा मेला प्रशासन ने लाखों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। पूरे मेला क्षेत्र को कई सेक्टरों में बांटा गया है। स्नान घाटों पर सुरक्षा के लिए ‘जल पुलिस’ और ‘गोताखोरों’ की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चेंजिंग रूम, पीने का पानी और स्वास्थ्य शिविर लगाए गए हैं। साथ ही, सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है ताकि आस्था का यह पर्व निर्विघ्न संपन्न हो सके।

“संगम की रेती पर माघ मास का निवास मनुष्य को आत्मिक शांति प्रदान करता है। इस बार का दुर्लभ ग्रह योग इस आध्यात्मिक यात्रा को और भी विशेष बना रहा है।” — स्वामी विज्ञानानंद, स्थानीय संत

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