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महिला आरक्षण पर विपक्ष की घेराबंदी: 15 अप्रैल को विपक्षी दलों की महाबैठक; जनगणना और परिसीमन की शर्त पर कांग्रेस का कड़ा ऐतराज

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित महिला आरक्षण कानून के कार्यान्वयन और उससे जुड़ी शर्तों को लेकर देश का सियासी पारा चढ़ गया है। सरकार के प्रस्तावों पर एक साझा और मजबूत रुख तय करने के लिए विपक्षी दलों ने आगामी 15 अप्रैल को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इसी कड़ी में, शुक्रवार को हुई कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाले संसद के विशेष सत्र के लिए रणनीतिक खाका तैयार किया गया। विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वह सदन में सरकार के प्रस्ताव के खिलाफ कड़े संशोधन पेश कर सकता है।

जनगणना और परिसीमन की शर्त पर विवाद

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण को 2026 की जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन से जोड़ने के सरकारी कदम का पुरजोर विरोध किया है।

  • तत्काल लागू करने की मांग: विपक्षी गठबंधन का तर्क है कि आरक्षण को जनगणना और परिसीमन जैसी जटिल प्रक्रियाओं से अलग रखा जाना चाहिए ताकि इसे जल्द से जल्द लागू किया जा सके। कांग्रेस कार्यसमिति ने इसे जानबूझकर देरी करने की रणनीति करार दिया है।
  • जाति जनगणना का मुद्दा: विपक्ष ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह महिला आरक्षण की आड़ में ‘जाति जनगणना’ की मांग को दरकिनार करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि बिना ओबीसी (OBC) कोटे के यह आरक्षण अधूरा रहेगा।

चुनावी राज्यों को प्रभावित करने का आरोप

बैठक के दौरान कांग्रेस ने संसद के विशेष सत्र की टाइमिंग (16-18 अप्रैल) पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

  • क्षेत्रीय राजनीति पर असर: विपक्ष का दावा है कि जब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव का प्रचार अपने चरम पर है, तब संसद सत्र बुलाना एक सोची-समझी रणनीति है।
  • प्रचार में बाधा: विपक्षी नेताओं का आरोप है कि भाजपा संसद के मंच का उपयोग इन राज्यों के चुनावों को प्रभावित करने के लिए कर रही है, ताकि विपक्षी दल प्रचार छोड़कर सदन की कार्यवाही में व्यस्त रहें।

15 अप्रैल की बैठक: साझा रणनीति की तैयारी

15 अप्रैल को होने वाली बैठक में ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के सभी प्रमुख घटकों के शामिल होने की संभावना है।

  • संयुक्त संशोधन: उम्मीद की जा रही है कि इस बैठक में विपक्षी दल एक साझा मसौदा तैयार करेंगे, जिसके तहत सदन में संशोधनों की झड़ी लगाई जाएगी।
  • एकजुटता का संदेश: विपक्ष यह संदेश देने की कोशिश में है कि वह महिला आरक्षण के पक्ष में तो है, लेकिन सरकार द्वारा थोपी गई शर्तों और ‘देरी’ करने की नीति के खिलाफ एकजुट है।

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