पश्चिम बंगाल में एक प्रशिक्षु डॉक्टर से कथित दुष्कर्म और उसकी हत्या के विरोध में देशभर नाराजगी है। वहीं राज्य में हंगामा जारी है। तनाव भरे हालात बने हुए है। इस बीच, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने महिलाओं की बिगड़ती स्थिति पर बात की। साथ ही उन्होंने महिलाओं के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों और आपातकालीन हेल्पलाइन जैसी केंद्र सरकार की योजनाओं को लागू करने में विफल रहने के लिए ममता बनर्जी सरकार की आलोचना की। महिला एवं बाल विकास मंत्री देवी ने कहा कि यह विडंबना है कि यह देश का एकमात्र राज्य है, जहां एक महिला मुख्यमंत्री है और अभी भी राज्य में महिलाओं की स्थिति बिगड़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल जैसे राज्य हैं, जहां हम केंद्र सरकार की योजनाओं को लागू कराने की कोशिश कर रहे हैं। मगर ऐसा नहीं हो रहा है। केंद्र सरकार की योजनाएं हैं, जैसे फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें और पॉक्सो अदालतें, जो महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए बनाई गई हैं, लेकिन राज्य (पश्चिम बंगाल) इसमें पीछे है। उन्होंने कहा, ‘हम योजना का खर्चा उठा रहे हैं ताकि आपको पैसा खर्च नहीं करना पड़े, लेकिन राज्य को इसे लागू तो करना होगा। हम महिलाओं और बच्चों से जुड़ी योजनाओं को लागू करने के लिए राज्य को सुझाव दे रहे हैं। पश्चिम बंगाल को आवंटित फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें (एफटीएससी) राज्य में अभी तक चालू नहीं हुई हैं।’
मंत्री ने आगे कहा, ’30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 409 विशेष पॉक्सो अदालतों समेत 752 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें (एफटीएससी) काम कर रही हैं। योजना शुरू होने के बाद से इन अदालतों ने 2,53,000 से अधिक मामलों का निपटारा किया है। इस योजना के तहत पश्चिम बंगाल को 123 अदालतें आवंटित की गई थीं, जिसमें 20 पॉक्सो न्यायालय और 103 संयुक्त फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें जो दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम दोनों मामलों को संभालते थे। हालांकि, इनमें से कोई भी अदालत शुरू नहीं हुई है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री ने प्रमुख आपातकालीन हेल्पलाइनों- महिला हेल्पलाइन (डब्ल्यूएचएल), आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ईआरएसएस) और चाइल्ड हेल्पलाइन को लागू नहीं करने के लिए भी राज्य की खिंचाई की। उन्होंने कहा कि ये सेवाएं हिंसा के पीड़ितों को तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन केंद्र द्वारा बार-बार याद दिलाए जाने के बावजूद पश्चिम बंगाल में इन्हें लागू नहीं किया।





