मुंबई/पुणे: महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों का लंबा इंतजार आज खत्म हो गया है। गुरुवार सुबह 7:30 बजे से मुंबई महानगर पालिका (BMC) के 227 वार्डों सहित राज्य के 29 नगर निगमों के लिए मतदान शुरू हो गया है। करीब तीन साल की देरी के बाद हो रहे इन चुनावों को 2026 की राजनीति का सबसे बड़ा लिटमस टेस्ट माना जा रहा है। मुंबई के 1.03 करोड़ से अधिक मतदाता आज एशिया की सबसे समृद्ध नगर निकाय की किस्मत का फैसला करेंगे। मतदान शाम 5:30 बजे तक चलेगा और वोटों की गिनती कल, यानी 16 जनवरी को की जाएगी।
मुंबई का दंगल: दिलचस्प हुए चुनावी समीकरण
इस बार बीएमसी चुनाव में गठबंधन के स्वरूप पूरी तरह बदले हुए नजर आ रहे हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय और रोमांचक हो गया है:
- ठाकरे बंधुओं का साथ: वर्षों की कड़वाहट के बाद उद्धव ठाकरे (Shiv Sena UBT) और राज ठाकरे (MNS) ने हाथ मिला लिया है। दोनों भाई ‘मराठी मानुस’ और ‘पुत्र-प्रधान’ राजनीति के एजेंडे पर एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं।
- महायुति की चुनौती: सत्ताधारी गठबंधन (BJP, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजीत पवार की NCP) मुंबई पर दशकों से चले आ रहे ठाकरे परिवार के कब्जे को तोड़ने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है।
- विपक्षी गठबंधन: कांग्रेस और प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) भी कई सीटों पर मजबूत चुनौती पेश कर रही है, जिससे वोटों के ध्रुवीकरण की संभावना बढ़ गई है।
आंकड़ों में चुनाव: बीएमसी की तस्वीर
मुंबई नगर निगम चुनाव से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े इस प्रकार हैं:
- कुल वार्ड: 227 (जिनमें से 114 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं)।
- उम्मीदवार: करीब 1,700 प्रत्याशी मैदान में हैं।
- मतदाता: 1,03,44,315 नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे (55.16 लाख पुरुष और 48.26 लाख महिला वोटर)।
- सुरक्षा बल: चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए मुंबई में 64,000 से अधिक पुलिसकर्मियों और चुनाव अधिकारियों की तैनाती की गई है।
इन बड़े शहरों में भी हो रही है वोटिंग
बीएमसी के अलावा महाराष्ट्र के 28 अन्य महत्वपूर्ण शहरों में भी आज ही मतदान हो रहा है:
- पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़: यहाँ भाजपा और अजीत पवार की एनसीपी के बीच वर्चस्व की सीधी जंग देखी जा रही है।
- ठाणे: यह मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का गृह क्षेत्र है, जहाँ उनकी साख दांव पर लगी है।
- अन्य शहर: नासिक, नागपुर, सोलापुर, कोल्हापुर और छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) जैसे प्रमुख शहरों में भी स्थानीय मुद्दों पर भारी मतदान की उम्मीद है।
प्रमुख मुद्दे: क्या है जनता के मन में?
स्थानीय निकायों के चुनाव होने के कारण जनता का ध्यान सीधे तौर पर बुनियादी सुविधाओं पर है:
- सड़कों की हालत और गड्ढों की समस्या।
- जल आपूर्ति और साफ-सफाई (Solid Waste Management)।
- मुंबई में बढ़ते ट्रैफिक जाम और प्रदूषण का मुद्दा।
- ‘लाडकी बहिन योजना’ जैसे लोक-लुभावन वादों का प्रभाव।
निष्कर्ष: 2026 की राजनीति का भविष्य
विशेषज्ञों का मानना है कि इन चुनावों के नतीजे तय करेंगे कि महाराष्ट्र की असली ‘शिवसेना’ और ‘एनसीपी’ कौन है। साथ ही, मुंबई पर जीत हासिल करने वाली पार्टी का आगामी विधानसभा और राष्ट्रीय राजनीति में कद काफी बढ़ जाएगा। प्रशासन ने वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने के लिए सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है और लोगों से अधिक से अधिक संख्या में मतदान करने की अपील की है।





