Saturday, January 3, 2026

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महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव: वोटिंग से पहले ही ‘महायुति’ का शक्ति प्रदर्शन, 66 सीटों पर निर्विरोध जीत ने सबको चौंकाया

मुंबई: महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों (Municipal Corporations) के लिए होने वाले आगामी मतदान से पहले ही सत्ताधारी ‘महायुति’ गठबंधन ने मनोवैज्ञानिक बढ़त बना ली है। शुक्रवार को नामांकन वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने मिलकर 66 सीटों पर निर्विरोध जीत दर्ज कर ली है। इसके अलावा, अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने भी 2 सीटें अपने नाम की हैं, जिससे महायुति का कुल आंकड़ा मतदान से पहले ही 68 पर पहुँच गया है।

कैसे संभव हुई यह निर्विरोध जीत?

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा का विषय है कि बिना एक भी वोट पड़े इतनी बड़ी संख्या में सीटें कैसे जीत ली गईं। इसके पीछे के मुख्य तकनीकी और रणनीतिक कारण निम्नलिखित हैं:

  • नामांकन वापसी (Withdrawal): शुक्रवार को नामांकन वापस लेने का आखिरी दिन था। कई वार्डों में विपक्षी दलों (MVA) के उम्मीदवारों और निर्दलीय प्रत्याशियों ने अपने नाम वापस ले लिए, जिससे केवल महायुति का उम्मीदवार ही मैदान में बचा।
  • नामांकन का रद्द होना (Scrutiny): कुछ सीटों पर विपक्षी उम्मीदवारों के नामांकन पत्र तकनीकी कमियों के कारण जांच (Scrutiny) के दौरान रद्द हो गए, जिससे सत्ताधारी दल के प्रत्याशियों के लिए रास्ता साफ हो गया।
  • विपक्ष की अनुपस्थिति: कुछ वार्डों में महायुति के मजबूत उम्मीदवारों के सामने अन्य दलों ने अपना प्रत्याशी ही नहीं उतारा या अंतिम समय में उनके डमी उम्मीदवारों ने नाम वापस ले लिया।

कहाँ कितनी सीटें मिलीं? (प्रमुख आंकड़े)

महायुति ने विशेष रूप से मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) और उत्तर महाराष्ट्र में अपना दबदबा दिखाया है:

नगर निगम बीजेपी की जीत शिवसेना (शिंदे) की जीत कुल निर्विरोध
कल्याण-डोंबिवली (KDMC) 15 06 21
जलगांव 06 06 12
पनवेल 06 06
भिवंडी-निजामपुर 06 06
ठाणे 07 07
पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ 04 04

 

नोट: अजित पवार की एनसीपी ने भी अहिल्यानगर (अहमदनगर) में 2 सीटें निर्विरोध जीती हैं।

 

विपक्ष के आरोप और चुनाव आयोग की सक्रियता

इस ‘क्लीन स्वीप’ ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। विपक्ष (महा विकास अघाड़ी) ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है:

  1. दबाव और धमकी का आरोप: शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत और प्रियंका चतुर्वेदी ने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी दल ने सरकारी मशीनरी और जांच एजेंसियों का डर दिखाकर विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन वापस लेने पर मजबूर किया है।
  2. धनबल का प्रयोग: विपक्षी दलों का दावा है कि कई उम्मीदवारों को भारी प्रलोभन देकर चुनावी मैदान से हटाया गया है।
  3. राज्य चुनाव आयोग (SEC) की जांच: विपक्ष की शिकायतों के बाद, राज्य चुनाव आयोग ने उन सभी नगर निगमों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है जहाँ बड़ी संख्या में निर्विरोध चुनाव हुए हैं। आयोग यह जांच करेगा कि क्या किसी उम्मीदवार को डराया या धमकाया गया था।

महायुति का पलटवार

दूसरी ओर, बीजेपी और शिवसेना (शिंदे) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समर्थकों का कहना है कि यह जीत सरकार के विकास कार्यों और जनता के भरोसे का परिणाम है। उनके अनुसार, विपक्ष के पास चुनाव लड़ने के लिए मजबूत उम्मीदवार ही नहीं बचे हैं।

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