दोहा/वॉशिंगटन: मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में तनाव के बीच एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरी दुनिया की सांसें थाम दी थीं। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के घातक SU-24 स्ट्राइक फाइटर जेट्स अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला करने के लिए उड़ान भर चुके थे और वे अपने लक्ष्य से महज 120 सेकंड (2 मिनट) की दूरी पर थे। विनाशकारी युद्ध शुरू होने ही वाला था कि तभी कतर ने एक ‘संकटमोचक’ की भूमिका निभाते हुए अंतिम क्षणों में दखल दिया। कतर की इस कूटनीतिक सक्रियता ने न केवल अमेरिकी सैनिकों की जान बचाई, बल्कि दुनिया को एक तीसरे विश्व युद्ध की आग में झुलसने से भी रोक लिया।
मिशन SU-24: जब ईरानी जेट्स ने भरी उड़ान
पेंटागन और क्षेत्रीय खुफिया सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार:
- सटीक निशाना: ईरान ने अपने रूसी निर्मित SU-24 विमानों को पूरी तरह हथियारों से लैस कर खाड़ी में मौजूद अमेरिकी नौसेना के बेड़े और सैन्य बेस की ओर रवाना किया था।
- चेतावनी का अभाव: ईरानी जेट्स ने रडार को चकमा देने के लिए कम ऊंचाई पर उड़ान भरी थी। जैसे ही वे अमेरिकी बेस के सुरक्षा घेरे के करीब पहुँचे, अमेरिकी रक्षा प्रणालियां (Patriot Missiles) सक्रिय हो गईं और जवाबी कार्रवाई के लिए ‘फायर’ का बटन दबने ही वाला था।
कतर की ‘हॉटलाइन’ डिप्लोमेसी: कैसे नाकाम हुआ अटैक?
जब दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सामने थीं, तब कतर के अमीर और उच्च अधिकारियों ने पर्दे के पीछे से मोर्चा संभाला:
- सीधा संपर्क: कतर ने तेहरान और वॉशिंगटन के बीच ‘हॉटलाइन’ (सीधे फोन संपर्क) का इस्तेमाल किया। कतरी मध्यस्थों ने ईरानी नेतृत्व को चेतावनी दी कि यह हमला ईरान के लिए आत्मघाती साबित होगा और अमेरिका को जवाबी हमला न करने के लिए मनाया।
- गारंटी और संदेश: कतर ने अमेरिका की ओर से ईरान को एक ठोस संदेश पहुँचाया कि यदि वे पीछे हटते हैं, तो तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक रास्ते खोले जाएंगे।
- यू-टर्न: कतर के हस्तक्षेप के बाद, ईरानी कमांड सेंटर ने अंतिम क्षणों में अपने पायलटों को ‘एबॉर्ट मिशन’ (Mission Abort) का आदेश दिया। ईरानी SU-24 जेट्स अमेरिकी बेस के बिल्कुल करीब पहुँचकर वापस अपनी सीमा में लौट गए।
क्यों अहम है कतर की भूमिका?
कतर दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल है जिसके संबंध अमेरिका और ईरान दोनों के साथ मजबूत हैं:
- अल-उदैद बेस: कतर में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य बेस (Al-Udeid) स्थित है, जहाँ से अमेरिका पूरे मिडिल ईस्ट पर नजर रखता है।
- विश्वसनीय मध्यस्थ: ईरान भी कतर पर भरोसा करता है क्योंकि कतर ने अतीत में भी कैदियों की रिहाई और परमाणु वार्ता में मदद की है।
अमेरिकी और ईरानी रक्षा मंत्रालय की चुप्पी
इस घटना के बाद दोनों ओर से कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान नहीं आया है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘क्लोज कॉल’ (बेहद करीबी मामला) था। अमेरिका ने अब खाड़ी क्षेत्र में अपनी सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है, वहीं ईरान ने अपनी वायुसेना को हाई अलर्ट पर रखा है।




