Saturday, January 31, 2026

Top 5 This Week

Related Posts

‘महापुरुषों की वाणी होगी फलीभूत, पूर्ण तेज के साथ जागृत होगा भारत’: हरिद्वार में बोले अमित शाह

हरिद्वार: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज देवभूमि हरिद्वार के प्रवास के दौरान भारत के भविष्य को लेकर एक बड़ा और आत्मविश्वास से भरा विजन पेश किया। पतंजलि योगपीठ के एक विशेष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब एक ऐसे युग में प्रवेश कर चुका है जहाँ प्राचीन ऋषियों और महापुरुषों की भविष्यवाणियां धरातल पर उतर रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आने वाले समय में भारत अपनी पूरी आध्यात्मिक और आधुनिक शक्ति (पूर्ण तेज) के साथ विश्व पटल पर एक मार्गदर्शक के रूप में जागृत होगा।

“संकल्प से सिद्धि का समय”

अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि सदियों पहले हमारे महापुरुषों ने जिस समृद्ध और शक्तिशाली भारत की कल्पना की थी, उसे साकार करने का समय अब आ गया है। उन्होंने कहा, “भारत की आत्मा जागृत हो चुकी है। अब वह समय दूर नहीं जब दुनिया के हर क्षेत्र में भारत का नेतृत्व स्वीकार किया जाएगा। यह केवल आर्थिक उन्नति नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का पुनरुत्थान है।”

स्वदेशी और योग की शक्ति पर जोर

गृह मंत्री ने पतंजलि के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि स्वदेशी और योग के माध्यम से भारत अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार योग ने वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान बनाई है, उसी प्रकार भारतीय आयुर्वेद और शिक्षा पद्धति भी दुनिया को नई राह दिखाएगी। उनके अनुसार, महापुरुषों ने जिस ‘विश्व गुरु’ भारत की बात कही थी, उसकी नींव रखी जा चुकी है।

युवा पीढ़ी से आह्वान

अमित शाह ने देश के युवाओं से अपील की कि वे अपनी विरासत पर गर्व करें और आधुनिक तकनीक के साथ-साथ अपनी संस्कृति को भी साथ लेकर चलें। उन्होंने कहा, “जब तक भारत का युवा अपनी परंपराओं से जुड़ा रहेगा, तब तक दुनिया की कोई भी ताकत हमें आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। महापुरुषों की वाणी तभी पूर्ण रूप से फलीभूत होगी जब हम एक अनुशासित और संकल्पित राष्ट्र के रूप में खड़े होंगे।”

विकसित भारत @2047 का लक्ष्य

अपने भाषण के अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत न केवल विकसित होगा, बल्कि अपनी पूर्ण आभा और सामर्थ्य के साथ दुनिया के लिए एक आदर्श बनेगा। हरिद्वार की इस पवित्र धरती से उन्होंने विश्वास जताया कि अध्यात्म और विज्ञान के समन्वय से ही भारत का ‘परम वैभव’ प्राप्त होगा।

Popular Articles