न्यूयॉर्क/तेहरान। आर्थिक संकट और बढ़ती महंगाई से जूझ रहे ईरान पर संयुक्त राष्ट्र ने गंभीर प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। इन प्रतिबंधों के तहत देश के अंतरराष्ट्रीय हथियार सौदे रोक दिए गए हैं और विदेशी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम ईरान की वैश्विक लेन-देन क्षमता को कमजोर करेगा और पहले से ही तनावपूर्ण अर्थव्यवस्था पर और दबाव डालेगा।
यूएन का रुख और प्रतिबंध का दायरा
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ईरान की हालिया गतिविधियों और परमाणु कार्यक्रमों को लेकर चिंता जताते हुए यह कदम उठाया है। प्रतिबंधों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- ईरान के हथियारों के आयात और निर्यात पर पूरी तरह रोक।
- विदेशी बैंकों में रखी ईरानी संपत्तियों को फ्रीज करना।
- उच्च तकनीक और सैन्य उपकरणों की बिक्री पर रोक।
- कुछ प्रमुख व्यापारिक और वित्तीय लेन-देन पर सीमित अनुमति।
महंगाई और आर्थिक संकट के बीच नया झटका
ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही उच्च मुद्रास्फीति और डॉलर की तुलना में रियाल के गिरते मूल्य से परेशान है। आम जनता पेट्रोलियम उत्पादों, खाद्य पदार्थों और दैनिक जरूरत की चीजों के बढ़ते दाम से जूझ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब इन नए प्रतिबंधों के बाद महंगाई और बेरोजगारी में और वृद्धि होने की संभावना है।
हथियार सौदों और सैन्य कार्यक्रम पर असर
यूएन प्रतिबंधों के लागू होने से ईरान के नए हथियार सौदों पर रोक लग जाएगी। इस कदम से देश की रक्षा क्षमताओं और क्षेत्रीय प्रभाव में संभावित कमी आ सकती है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय रक्षा कंपनियों और साझेदार देशों के साथ ईरान के सैन्य व्यापारिक संबंध भी प्रभावित होंगे।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भविष्य
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस फैसले का स्वागत किया है, लेकिन कुछ देशों ने इस पर आपत्ति जताई है कि इससे ईरान की आम जनता पर अधिक प्रभाव पड़ेगा। संयुक्त राष्ट्र ने आश्वासन दिया है कि प्रतिबंध केवल सरकार और सैन्य संस्थाओं को लक्षित करेंगे, ताकि नागरिकों की स्थिति पर न्यूनतम असर पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान इन प्रतिबंधों के तहत नीतिगत सुधार और अंतरराष्ट्रीय समझौतों की दिशा में कदम नहीं उठाता, तो यह उसकी वैश्विक आर्थिक और राजनैतिक स्थिति को और कमजोर कर सकता है।





