मुंबई। महाराष्ट्र में गैर-मराठी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए एक साल की अतिरिक्त मोहलत दिए जाने के बाद चालकों ने राहत की सांस ली है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भाषा संबंधी नियमों के पालन के लिए चालकों को अतिरिक्त समय देने का फैसला किया है। इससे उन हजारों चालकों को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें तय समयसीमा के भीतर मराठी का कार्यसाधक ज्ञान हासिल करना था।
पहले 15 अगस्त थी समयसीमा
सरकार के निर्देश के तहत ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी का कार्यसाधक ज्ञान जरूरी किया गया था। इसके लिए पहले 15 अगस्त तक की समयसीमा निर्धारित थी। समयसीमा नजदीक आने पर गैर-मराठी चालकों के बीच चिंता बढ़ गई थी। कई चालकों ने सरकार से अतिरिक्त समय देने की मांग की थी।
एक साल में सीखनी होगी मराठी
मुख्यमंत्री फडणवीस ने चालकों की व्यावहारिक परेशानियों को देखते हुए उन्हें मराठी सीखने के लिए एक वर्ष का अतिरिक्त समय देने की घोषणा की। सरकार का उद्देश्य यह है कि सार्वजनिक परिवहन से जुड़े चालक यात्रियों के साथ स्थानीय भाषा में बुनियादी संवाद कर सकें।
फैसले के बाद मुंबई में कई गैर-मराठी चालकों ने खुशी जताई। उनका कहना है कि अतिरिक्त समय मिलने से वे बिना काम प्रभावित हुए धीरे-धीरे मराठी सीख सकेंगे। कई चालक पहले से ही रोजमर्रा की जरूरत के लिए मराठी के सामान्य शब्द और वाक्य सीखने की कोशिश कर रहे हैं।
राजनीतिक विवाद भी जारी
मराठी भाषा को लेकर महाराष्ट्र में राजनीतिक बहस भी तेज है। जहां सरकार का कहना है कि स्थानीय भाषा का ज्ञान यात्रियों और चालकों के बीच बेहतर संवाद के लिए जरूरी है, वहीं कुछ राजनीतिक दलों ने एक साल की मोहलत देने के फैसले की आलोचना की है।
फिलहाल एक साल की मोहलत से गैर-मराठी ऑटो और टैक्सी चालकों को तत्काल कार्रवाई के दबाव से राहत मिली है। अब उनके सामने अगले एक साल में मराठी सीखने और निर्धारित नियमों का पालन करने की चुनौती होगी।





