नई दिल्ली/कोलकाता: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष याचिका दायर की है। ईडी ने अपनी अर्जी में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) और कोलकाता पुलिस कमिश्नर पर केंद्रीय एजेंसी की जांच में जानबूझकर बाधा डालने और महत्वपूर्ण सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है। एजेंसी ने शीर्ष अदालत से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए इसे राज्य पुलिस के हाथ से छीनकर सीबीआई (CBI) को सौंप दिया जाए।
ईडी के आरोप: ‘सत्ता के रसूख से जांच को प्रभावित करने की कोशिश’
सुप्रीम कोर्ट में सौंपी गई अपनी दलील में ईडी ने हालिया छापेमारी का जिक्र करते हुए कई सनसनीखेज आरोप लगाए हैं:
- डिजिटल साक्ष्यों की चोरी: ईडी का दावा है कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री और उनके सहयोगियों ने हस्तक्षेप किया, जिसके कारण जांच टीम के हाथ से कई महत्वपूर्ण हार्ड डिस्क और मोबाइल फोन जबरन ले लिए गए।
- जांच अधिकारियों को धमकी: एजेंसी ने आरोप लगाया है कि जब अधिकारी अपनी कानूनी ड्यूटी कर रहे थे, तब स्थानीय पुलिस और सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं ने उन्हें डराया-धमकाया और बंधक जैसी स्थिति पैदा कर दी।
- साक्ष्यों को नष्ट करना: ईडी ने अंदेशा जताया है कि जो दस्तावेज और डिवाइस प्रशासन ने अपने कब्जे में लिए हैं, उनके डेटा को पूरी तरह नष्ट या बदला जा सकता है, जिससे करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच बेपटरी हो जाएगी।
विवाद की जड़: आई-पैक (I-PAC) रेड और कोयला घोटाला
यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित कोयला चोरी घोटाले से जुड़ा है, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग की जांच चल रही है:
- छापेमारी का विरोध: पिछले सप्ताह जब ईडी की टीम राजनीतिक सलाहकार फर्म आई-पैक के ठिकानों पर पहुंची थी, तब मुख्यमंत्री ने खुद वहां पहुंचकर रेड का कड़ा विरोध किया था।
- संवैधानिक संकट: ईडी का तर्क है कि राज्य सरकार केंद्रीय एजेंसियों को अपना काम करने से रोककर एक तरह का ‘संवैधानिक संकट’ (Constitutional Crisis) पैदा कर रही है।
ममता बनर्जी और टीएमसी का स्टैंड: ‘यह राजनीतिक बदला है’
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इन आरोपों को निराधार बताया है:
- निजता का हनन: टीएमसी का कहना है कि ईडी जांच के नाम पर पार्टी की गोपनीय चुनावी रणनीतियों को चुराने की कोशिश कर रही है।
- राज्य के अधिकारों का हनन: मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार संघीय ढांचे का अपमान कर रही है और विपक्षी दलों को दबाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा अगला कदम?
सुप्रीम कोर्ट इस मामले में जल्द सुनवाई कर सकता है। बंगाल सरकार ने भी किसी भी एकतरफा आदेश से बचने के लिए कोर्ट में ‘कैविएट’ (Caveat) दाखिल कर दी है। कोर्ट को अब यह तय करना है कि क्या केंद्रीय एजेंसियों को काम करने के लिए विशेष सुरक्षा की जरूरत है या राज्य पुलिस द्वारा दर्ज की गई जवाबी एफआईआर जायज है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला भविष्य में केंद्रीय एजेंसियों की कार्यप्रणाली और राज्य सरकारों के हस्तक्षेप की सीमा तय करेगा। फिलहाल, कोलकाता से दिल्ली तक इस मामले ने राजनीतिक सरगर्मी को चरम पर पहुंचा दिया है।





