नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 135वें संस्करण में देशवासियों से आगामी त्योहारों के दौरान प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की जगह मिट्टी से बनी पर्यावरण-अनुकूल मूर्तियों का उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाई गई मिट्टी की मूर्तियां खरीदने से न केवल पर्यावरण संरक्षण होगा, बल्कि ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को भी मजबूती मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि गणेश उत्सव की तैयारियां काफी पहले शुरू हो जाती हैं, इसलिए अभी से यह संकल्प लेना आवश्यक है कि घरों और सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित की जाने वाली प्रतिमाएं मिट्टी की हों। उन्होंने लोगों से खरीदारी के समय यह भी सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि मूर्ति स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाई गई हो और प्लास्टर ऑफ पेरिस से निर्मित न हो। उनका कहना था कि मिट्टी की मूर्तियां जल में आसानी से विलीन हो जाती हैं, जिससे नदियों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाया जा सकता है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने नागरिकों से जीवन और फसल बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के महत्व को समझने और अधिक से अधिक लोगों तक इनका लाभ पहुंचाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि बीमा केवल आर्थिक सुरक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में परिवारों को संबल प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण साधन है।
प्रधानमंत्री मोदी ने देश में आत्मनिर्भरता की दिशा में हो रही प्रगति का उल्लेख करते हुए रक्षा और विमानन क्षेत्र में स्वदेशी उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने ‘मेड इन इंडिया’ सी-295 विमान, स्वदेशी युद्धपोतों और लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल के सफल परीक्षण का जिक्र करते हुए कहा कि भारत समुद्र से लेकर आसमान तक आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की सफलता का भी उल्लेख किया और कहा कि दुनिया भर में हजारों स्थानों पर योग कार्यक्रम आयोजित हुए, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक नेतृत्व का प्रतीक हैं। प्रधानमंत्री ने अंत में जल संरक्षण, जनभागीदारी और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का संदेश देते हुए देशवासियों से इन अभियानों को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया।





