Wednesday, February 4, 2026

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मणिपुर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली: एक साल बाद हटा राष्ट्रपति शासन; भाजपा ने राज्यपाल के समक्ष पेश किया सरकार बनाने का दावा

इम्फाल: जातीय हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के चलते लगभग एक साल से राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) के अधीन रहे मणिपुर में अब लोकतांत्रिक सरकार की वापसी का रास्ता साफ हो गया है। केंद्र सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने मणिपुर से तत्काल प्रभाव से राष्ट्रपति शासन हटाने की मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तुरंत बाद, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य में अपनी नई सरकार बनाने की कवायद तेज कर दी है। भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर बहुमत का आंकड़ा और सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश किया है। राज्य में शांति बहाली की चुनौतियों के बीच यह कदम राजनीतिक स्थिरता की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है।

राष्ट्रपति शासन हटने का संवैधानिक और राजनीतिक आधार

मणिपुर में पिछले साल मई में भड़की हिंसा के बाद अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाया गया था:

  • सुरक्षा स्थिति में सुधार: गृह मंत्रालय की हालिया रिपोर्टों में राज्य की सुरक्षा स्थिति में क्रमिक सुधार और शांति की ओर बढ़ते कदमों का हवाला दिया गया, जिसके बाद राष्ट्रपति शासन हटाने का निर्णय लिया गया।
  • लोकतांत्रिक अधिकार: केंद्र सरकार का मानना है कि चुनी हुई सरकार के माध्यम से ही समुदायों के बीच विश्वास बहाली (Confidence Building) और विकास के कार्यों को बेहतर ढंग से जमीन पर उतारा जा सकता है।

भाजपा का दावा और भावी मुख्यमंत्री का चेहरा

भाजपा ने अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर राजभवन में बहुमत का पत्र सौंपा है:

  1. संख्या बल: भाजपा ने दावा किया है कि उसके पास सदन में आवश्यक बहुमत से अधिक विधायकों का समर्थन प्राप्त है। इसमें कुछ निर्दलीय और छोटे क्षेत्रीय दलों का समर्थन भी शामिल बताया जा रहा है।
  2. नेतृत्व पर चर्चा: अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि सरकार की कमान पुराने चेहरे के पास रहेगी या हाईकमान किसी नए नेता को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपेगा। हालांकि, पार्टी सूत्रों का कहना है कि शपथ ग्रहण समारोह अगले 48 घंटों के भीतर हो सकता है।
  3. स्थिरता का संकल्प: सरकार बनाने का दावा पेश करने के बाद भाजपा नेताओं ने कहा कि उनकी प्राथमिकता राज्य में पूर्ण शांति स्थापित करना और विस्थापित लोगों का पुनर्वास करना है।

मणिपुर के सामने खड़ी प्रमुख चुनौतियां

नई सरकार के गठन के साथ ही प्रशासन के सामने कई जटिल कार्य होंगे:

  • समुदायों के बीच संवाद: कुकी और मैतेई समुदायों के बीच पैदा हुई गहरी खाई को पाटना और दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
  • पुनर्वास और मुआवजा: हिंसा में अपने घर और संपत्ति खोने वाले हजारों लोगों को सुरक्षित उनके मूल स्थानों पर वापस बसाना।
  • कानून-व्यवस्था: अवैध हथियारों की बरामदगी और सीमा सुरक्षा को मजबूत करना ताकि भविष्य में हिंसा की पुनरावृत्ति न हो।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति शासन हटाने के समय पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार को पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि राज्य का हर हिस्सा सुरक्षित है। उन्होंने राज्यपाल से मांग की है कि सरकार बनाने का मौका देने से पहले सभी विधायकों की परेड कराई जाए और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

“मणिपुर में राष्ट्रपति शासन का हटना लोकतंत्र की जीत है। हम एक ऐसी सरकार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो राज्य के हर नागरिक की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करे। हमारा ध्यान केवल विकास और शांति पर है।” — भाजपा प्रदेश अध्यक्ष

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