Saturday, January 31, 2026

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मजारों के ‘मकरजाल’ पर धामी सरकार का हंटर: एक ही नाम से बनी अनेक मजारों पर सीएम सख्त; वक्फ बोर्ड से मांगी विस्तृत रिपोर्ट, अवैध अतिक्रमण पर चलेगा बुलडोजर

देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में सरकारी भूमि और वन क्षेत्रों में मजारों के नाम पर किए गए अवैध अतिक्रमण को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। हाल ही में यह चौंकाने वाला मामला सामने आया है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में एक ही ‘पीर’ के नाम पर कई मजारें स्थापित कर दी गई हैं। मुख्यमंत्री ने इसे एक सोची-समझी साजिश और ‘लैंड जिहाद’ का हिस्सा बताते हुए उत्तराखंड वक्फ बोर्ड से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। सीएम धामी ने स्पष्ट किया है कि देवभूमि के मूल स्वरूप से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जो भी मजारें अवैध पाई जाएंगी, उन्हें तुरंत ध्वस्त किया जाएगा।

विवाद का केंद्र: एक पीर, दर्जनों मजारें

खुफिया रिपोर्ट और स्थानीय शिकायतों के बाद यह मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में आया:

  • संदेहास्पद विस्तार: जांच में पाया गया कि कुछ विशेष मजारें ऐसी हैं जिनका नाम एक ही है, लेकिन वे राज्य के अलग-अलग कोनों में रातों-रात खड़ी कर दी गई हैं।
  • पहचान का संकट: सीएम ने सवाल उठाया कि एक ही व्यक्ति की मजारें अलग-अलग स्थानों पर कैसे हो सकती हैं? उन्होंने वक्फ बोर्ड से पूछा है कि इन मजारों का इतिहास क्या है और इनके पास भूमि के स्वामित्व के क्या दस्तावेज हैं।
  • वन भूमि पर कब्जा: अधिकतर ऐसी संदिग्ध मजारें आरक्षित वन क्षेत्रों (Reserved Forests) और नदियों के किनारे सरकारी जमीन पर पाई गई हैं।

वक्फ बोर्ड को अल्टीमेटम: देनी होगी पाई-पाई की रिपोर्ट

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद वक्फ बोर्ड हरकत में आ गया है:

  1. पंजीकरण की जांच: बोर्ड को निर्देश दिया गया है कि वह उन सभी संपत्तियों की सूची सौंपे जो उसके पास पंजीकृत हैं और जो हाल के वर्षों में बनी हैं।
  2. सत्यापन प्रक्रिया: प्रशासन अब उन मजारों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करेगा जहाँ एक ही नाम का उपयोग किया जा रहा है।
  3. अवैध निर्माण पर कार्रवाई: वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने भी मुख्यमंत्री के रुख का समर्थन करते हुए कहा है कि ‘मजारों के नाम पर धंधा’ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

देवभूमि के स्वरूप का संरक्षण: ‘लैंड जिहाद’ पर वार

मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में बार-बार ‘सॉफ्ट स्टेट’ न बनने की बात दोहराई है:

  • सांस्कृतिक सुरक्षा: सरकार का मानना है कि बाहरी तत्वों द्वारा राज्य की जनसांख्यिकी (Demography) बदलने और सरकारी संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए धार्मिक प्रतीकों का सहारा लिया जा रहा है।
  • अब तक की कार्रवाई: प्रशासन अब तक राज्य में 400 से अधिक अवैध मजारों को हटा चुका है, लेकिन ‘एक ही नाम’ वाला नया पैटर्न सामने आने के बाद अभियान को और तेज किया जाएगा।
  • पारदर्शिता का आदेश: सीएम ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में ऐसी संरचनाओं की पहचान करें जिनकी कोई ऐतिहासिक पृष्ठभूमि नहीं है।

 

उत्तराखंड सरकार का यह कदम राज्य में धार्मिक अतिक्रमण के खिलाफ चल रहे अभियान का अगला चरण है। एक ही पीर के नाम पर कई मजारों का होना न केवल आस्था का विषय है, बल्कि यह कानूनी और सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। मुख्यमंत्री के इस सख्त रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में वक्फ बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर उत्तराखंड में एक बड़ा ध्वस्तीकरण अभियान (Demolition Drive) देखने को मिल सकता है।

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