Friday, January 2, 2026

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मंदिर के चक्रव्यूह में फंसी कांग्रेस पार नहीं पाई

केदारनाथ उपचुनाव सिर्फ एक विस सीट नहीं रहा। इस सीट पर प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा की प्रतिष्ठा नहीं विचारधारा भी दांव पर लगी थी। बदरीनाथ में हार के बाद उसे वैचारिक मोर्चे पर रक्षात्मक होना पड़ा था। पार्टी ऐसी असहज स्थिति दोबारा नहीं बनने देना चाहती थी। इसलिए पार्टी ने उपचुनाव पूरी ताकत झोंकी।

90 हजार से अधिक मतदाता वाली केदारनाथ विधानसभा की जनता ने शनिवार को अपना जनादेश दिया। जनता ने भाजपा प्रत्याशी आशा नौटियाल को अपना विधायक चुना है। इसी के साथ केदारनाथ विधानसभा में महिला प्रत्याशी की जीत का मिथक भी भाजपा ने दोहराया। पिछले करीब तीन महीने से उपचुनाव की तैयारी में जुटे सियासी दलों की तैयारियों और प्रत्याशियों और उनके समर्थकों के लगातार 17 दिन तक किए धुआंधार प्रचार का फल जनता ने भाजपा की झोली में डाला। अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए भाजपा ने कई कसर नहीं छोड़ी। वहीं केदारनाथ उपचुनाव के दौरान कांग्रेस ने नई दिल्ली में केदारनाथ मंदिर के शिलान्यास को मुद्दा बनाने पर पूरा जोर दिया। लेकिन केदारनाथ मंदिर के चक्रव्यूह में कांग्रेस खुद ही फंस गई और पार नहीं पा पाई। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी उपचुनाव का रुख भाजपा के पक्ष में कराने को ताकत झोंकने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। आपदा के प्रभावितों के लिए विशेष पैकेज से लेकर विस क्षेत्र के विकास से जुड़ी योजनाओं की स्वीकृति तक के निर्णय फटाफट लिए। चुनाव की घोषणा से पहले ही केदारनाथ की जनता के बीच बार-बार पहुंचे और प्रचार के आखिरी दिन भी उन्होंने डेरा जमाया।

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