नई दिल्ली, 15 अक्तूबर।
भारत को सातवीं बार संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के लिए निर्विरोध चुना गया है। इसके साथ ही भारत का आगामी तीन वर्षीय कार्यकाल शुरू होगा, जो देश की वैश्विक मानवाधिकार नीति में स्थिरता और सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है।
भारत का यूएन मानवाधिकार परिषद में निर्विरोध चयन इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भारत की मानवाधिकार पर प्रतिबद्धता और स्थिर भूमिका को व्यापक समर्थन प्राप्त है। यह परिषद संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख मंचों में से एक है, जो वैश्विक मानवाधिकार मानकों की निगरानी और प्रवर्तन में अहम भूमिका निभाती है।
भारत के कार्यकाल के दौरान अपेक्षा है कि देश मानवाधिकार संरक्षण, अल्पसंख्यकों के अधिकार, लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर वैश्विक स्तर पर अपनी सक्रिय भूमिका निभाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की भागीदारी से दक्षिण एशियाई मुद्दों और विकासशील देशों की आवाज़ को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती मिलेगी।
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारत की लगातार सातवीं बार परिषद में सदस्यता ने वैश्विक मंच पर देश की कूटनीतिक दक्षता और स्थिर मानवाधिकार नीति को रेखांकित किया है। मंत्रालय ने कहा कि भारत परिषद में सकारात्मक और संतुलित दृष्टिकोण के साथ योगदान देगा।
यूएन मानवाधिकार परिषद में कुल 47 सदस्य देश होते हैं, जो भौगोलिक आधार पर अलग-अलग समूहों से निर्वाचित होते हैं। सदस्य देशों का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है और परिषद की बैठकों में सदस्य देशों को मानवाधिकार मुद्दों पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने, समीक्षा और सिफारिशें देने का अधिकार होता है।
भारत ने हमेशा परिषद में समानता, न्याय और सार्वभौमिक मानवाधिकार के सिद्धांतों पर जोर दिया है। कार्यकाल के दौरान भारत की भूमिका मानवाधिकार उल्लंघनों की रोकथाम, विकासशील देशों के मुद्दों को उजागर करने और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के प्रचार-प्रसार पर केंद्रित रहेगी।
इस निर्विरोध चुनाव से स्पष्ट होता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भारत की मानवाधिकार नीति और कूटनीतिक विश्वास मजबूत है और देश इस परिषद में सक्रिय और संतुलित योगदान देने के लिए तैयार है।





