मॉस्को। टैरिफ युद्ध और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच रूस ने भारत के साथ अपने संबंधों पर बड़ा बयान दिया है। मॉस्को ने साफ कहा है कि भारत-रूस के रिश्ते ऐतिहासिक, भरोसेमंद और बहुआयामी हैं। इन्हें कमजोर करने या तोड़ने की कोशिशें कभी सफल नहीं होंगी।
रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत और रूस दशकों से एक-दूसरे के भरोसेमंद साझेदार रहे हैं। “हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि द्विपक्षीय रिश्तों को तोड़ने या इनके बीच दरार डालने के प्रयास पूरी तरह बेकार साबित होंगे। हमारे संबंध आपसी सम्मान, समान हितों और दीर्घकालिक सहयोग पर आधारित हैं,” उन्होंने कहा।
टैरिफ युद्ध की पृष्ठभूमि
हाल ही में अमेरिका और यूरोपीय संघ ने व्यापारिक टैरिफ बढ़ाकर रूस पर दबाव बनाने की कोशिश की है। इस बीच भारत को भी पश्चिमी देशों की ओर से रूस से ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में सहयोग कम करने के संकेत मिले हैं। लेकिन रूस का कहना है कि इन सबके बावजूद भारत-रूस साझेदारी अपने रास्ते पर आगे बढ़ती रहेगी।
ऊर्जा और रक्षा सहयोग अहम
रूस ने इस दौरान ऊर्जा और रक्षा सहयोग को दोनों देशों की साझेदारी की रीढ़ बताया। मॉस्को ने कहा कि भारत उसकी ऊर्जा जरूरतों के लिए सबसे बड़ा और भरोसेमंद उपभोक्ता है, वहीं रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों का दशकों पुराना रिश्ता है। “हम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए हमेशा तैयार रहेंगे,” प्रवक्ता ने जोड़ा।
पश्चिमी दबाव का असर नहीं
जखारोवा ने यह भी कहा कि पश्चिमी देशों की ओर से लगाए गए प्रतिबंध और टैरिफ वॉर, भारत और रूस के बीच सहयोग को प्रभावित नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि यह रिश्ते किसी तीसरे देश पर आधारित नहीं हैं, बल्कि स्वतंत्र और रणनीतिक साझेदारी पर खड़े हैं।
भारत की भूमिका पर भरोसा
रूस ने उम्मीद जताई कि भारत वैश्विक चुनौतियों के बीच संतुलित कूटनीति जारी रखेगा। मॉस्को के अनुसार, भारत-रूस संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान तक फैले हुए हैं।





