वॉशिंगटन / नई दिल्ली, 15 अक्तूबर।
अमेरिकी विदेश नीति और भारत-अमेरिका संबंधों के प्रमुख रणनीतिकार माने जाने वाले एश्ले जे. टेलिस (Ashley J. Tellis) एक गंभीर विवाद में फंस गए हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन पर चीन के लिए जासूसी करने का आरोप लगाया गया है। टेलिस भारत में जन्मे एक प्रख्यात रणनीतिक विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों के लिए विदेश नीति, रक्षा और एशिया मामलों के सलाहकार के रूप में काम किया है।
एश्ले जे. टेलिस का जन्म भारत में हुआ था, लेकिन बाद में वे अमेरिका चले गए और वहीं नागरिकता ग्रहण की। उन्होंने प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो से उच्च शिक्षा प्राप्त की और जल्द ही अमेरिकी विदेश नीति के सर्कल में एक प्रभावशाली आवाज बन गए।
वर्तमान में वे कार्नेगी एंडॉवमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस (Carnegie Endowment for International Peace) में वरिष्ठ फेलो हैं। इससे पहले वे व्हाइट हाउस की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (NSC) और अमेरिकी विदेश मंत्रालय में उच्च पदों पर कार्य कर चुके हैं।
टेलिस को विशेष रूप से भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के वास्तुकारों में से एक माना जाता है। उन्होंने 2005 में तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच हुए परमाणु समझौते (India-US Civil Nuclear Deal) को आकार देने में अहम भूमिका निभाई थी।
हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अमेरिकी जांच एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, टेलिस पर आरोप है कि उन्होंने एशिया नीति से संबंधित संवेदनशील जानकारियां चीन से जुड़े एक थिंक टैंक को साझा कीं।
सूत्रों का दावा है कि इन जानकारियों में अमेरिकी रक्षा रणनीति, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य तैनाती और इंडो-पैसिफिक गठबंधन (QUAD) से जुड़ी सूचनाएं शामिल थीं। फिलहाल अमेरिकी न्याय विभाग ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है।
टेलिस पर लगे आरोपों ने अमेरिकी नीति जगत और कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। वॉशिंगटन में उन्हें लंबे समय से भारत मामलों के शीर्ष विशेषज्ञों में गिना जाता है। वे कई बार अमेरिकी कांग्रेस की समितियों के सामने भारत, चीन और दक्षिण एशिया नीति पर गवाही दे चुके हैं।
एश्ले टेलिस ने न केवल रणनीतिक साझेदारी बल्कि रक्षा सहयोग, तकनीकी हस्तांतरण और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा नीति के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने कई पुस्तकों और रिपोर्ट्स के माध्यम से भारत की भूमिका को “उभरती वैश्विक शक्ति” के रूप में स्थापित करने की वकालत की थी।
इस बीच, टेलिस ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से सख्त इनकार किया है। उन्होंने कहा कि उनका पूरा करियर लोक सेवा, शैक्षणिक शोध और रणनीतिक साझेदारी के लिए समर्पित रहा है और वे किसी भी “विदेशी शक्ति” के लिए काम नहीं कर रहे।
जांच एजेंसियों ने टेलिस के ईमेल, संचार रिकॉर्ड और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की गहन जांच शुरू कर दी है। अगर आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला अमेरिकी खुफिया इतिहास के सबसे बड़े कूटनीतिक झटकों में से एक माना जाएगा।
एश्ले टेलिस पिछले दो दशकों से भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों के सेतु के रूप में देखे जाते रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ लगे जासूसी के आरोप न केवल वॉशिंगटन बल्कि नई दिल्ली में भी चिंता का विषय बन गए हैं।





