हमास और इस्राइल बीते नौ महीने से जंग लड़ रहे हैं। इस्राइल द्वारा हमास को खत्म करने का संकल्प गाजा पट्टी के लोगों पर भारी पड़ रहा है। गाजा में पैदा हुई मानवीय परिस्थितियों को लेकर देशभर में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कुछ देश इस्राइल पर लगातार स्थायी युद्धविराम के लिए दबाव डाल रहे हैं। हालांकि, यहां के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अब एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र में युद्धविराम और बंधकों की रिहाई का मामला उठा। भारत ने गाजा में तुरंत युद्धविराम और बिना किसी शर्त के बंधकों की रिहाई का आह्वान किया। पश्चिम एशिया पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की खुली चर्चा में संयुक्त राष्ट्र में भारत के उप प्रतिनिधि आर रवींद्र ने यह भी बताया कि भारत, फलस्तीन के लोगों के लिए एक विश्वसनीय विकास भागीदार रहा है। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न रूपों में भारत ने फलस्तीन की करीब 12 करोड़ डॉलर की विकासात्मक सहायता की है, जिसमें यूएनआरडब्ल्यूए में योगदान के रूप में 3.5 करोड़ डॉलर भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘भारत उन देशों में से है, जिन्होंने पिछले साल सात अक्तूबर को इस्राइल पर हुए आतंकवादी हमलों की कड़ी निंदा की। इतना ही नहीं हमने इस्राइल-हमास युद्ध में नागरिकों की जान जाने की भी निंदा की है। हम लगातार संयम, तनाव कम करने और वार्ता एवं कूटनीति के जरिए संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दे रहे हैं।’





