नई दिल्ली/काठमांडू।
भारत और नेपाल के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए दोनों देशों ने रेल व्यापार समझौता (Rail Trade Agreement) को अंतिम रूप दे दिया है। इस समझौते के बाद जोगबनी–विराटनगर रेल लिंक के माध्यम से कार्गो ढुलाई सुगम होगी और सीमा पार व्यापार नई गति प्राप्त करेगा।
दोनों देशों के अधिकारियों के अनुसार, यह समझौता लंबे समय से चल रही चर्चाओं का परिणाम है। जोगबनी (भारत) से विराटनगर (नेपाल) तक बनने वाले रेल मार्ग को दोनों देशों के बीच प्रमुख व्यापारिक कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। समझौते के तहत अब इस रेल लिंक के माध्यम से मालगाड़ियों के संचालन, शुल्क ढांचे, सीमा औपचारिकताओं और सुरक्षा प्रावधानों के लिए एक मानक प्रक्रिया तय कर दी गई है।
रेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस नई व्यवस्था से विशेष रूप से नेपाल की ओर से आयात होने वाले निर्माण सामग्री, ईंधन, खाद्यान्न और उपभोक्ता वस्तुओं की ढुलाई में तेजी आएगी। इससे ट्रकों पर निर्भरता कम होगी, यातायात दबाव घटेगा और लागत में भी कमी आएगी। वहीं, भारत के पूर्वोत्तर और बिहार क्षेत्र के व्यापारियों के लिए भी यह लिंक नए व्यापारिक अवसर पैदा करेगा।
नेपाल सरकार ने इस समझौते को अपने व्यापारिक ढांचे के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया है। अधिकारियों ने कहा कि नई रेल व्यवस्था न केवल व्यापार संतुलन को सकारात्मक दिशा देगी बल्कि दोनों देशों के बीच संपर्क, संपर्क-आधारभूत ढांचे और आर्थिक सहयोग में भी उल्लेखनीय वृद्धि करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रेल समझौता भारत-नेपाल संबंधों में ‘कनेक्टिविटी बूस्टर’ की भूमिका निभाएगा। इसके साथ ही, दोनों देश भविष्य में अन्य सीमावर्ती रेल परियोजनाओं को भी गति देने की तैयारी में हैं, जिससे क्षेत्रीय व्यापार और यातायात को और मजबूती मिलेगी।





