Friday, January 16, 2026

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भारत-जर्मनी सबमरीन डील: क्यों भारतीय नौसेना के लिए अहम है Project-75I

भारत और जर्मनी के बीच छह आधुनिक पारंपरिक पनडुब्बियों (सबमरीन) की खरीद को लेकर चल रही बातचीत ने एक बार फिर रणनीतिक और रक्षा हलकों में हलचल बढ़ा दी है। भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि जर्मनी के साथ इस बहुप्रतीक्षित सबमरीन डील पर तकनीकी, वित्तीय और व्यावसायिक स्तर पर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है, हालांकि अभी समझौता अंतिम रूप नहीं ले पाया है।

यह पुष्टि जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा के दौरान सामने आई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चांसलर मर्ज़ के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा और सुरक्षा सहयोग एक प्रमुख एजेंडा रहा। संयुक्त प्रेस वक्तव्य के बाद विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि इस तरह के रक्षा सौदों में कई स्तरों पर चर्चा होती है और फिलहाल बातचीत में सकारात्मक गति बनी हुई है।

भारत-जर्मनी रक्षा सहयोग में नई रफ्तार

भारतीय अधिकारियों के अनुसार, हाल के वर्षों में जर्मनी ने अपनी रक्षा निर्यात नीति में बदलाव किया है, जिससे भारत जैसे रणनीतिक साझेदारों के लिए सैन्य उपकरणों की खरीद आसान हुई है। पहले जिन रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी मिलने में लंबा समय लगता था, अब उन्हें तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है। भारत ने साफ किया है कि उसकी सैन्य खरीद पूरी तरह राष्ट्रीय सुरक्षा हितों और परिचालन आवश्यकताओं पर आधारित होती है।

Project-75I: भारतीय नौसेना की रणनीतिक जरूरत

यह प्रस्तावित डील भारतीय नौसेना के महत्वाकांक्षी Project-75I से जुड़ी है, जिसके तहत छह अगली पीढ़ी की डीज़ल-इलेक्ट्रिक सबमरीन को नौसेना में शामिल किया जाना है। इन पनडुब्बियों में Air Independent Propulsion (AIP) तकनीक, अत्याधुनिक सेंसर और आधुनिक हथियार प्रणाली शामिल होंगी। यह परियोजना Strategic Partnership Model के तहत लाई गई है और इसका निर्माण भारत में ही—मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) में किया जाना प्रस्तावित है, जो ‘Make in India’ पहल को भी मज़बूती देती है।

क्यों बढ़ी अंडरसी क्षमता की जरूरत

भारत के लिए पनडुब्बी क्षमता इस समय बेहद अहम हो गई है। एक ओर पाकिस्तान के साथ तनाव बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर चीन ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी और सबमरीन गश्त को तेज़ किया है। ऐसे में समुद्र के भीतर अदृश्य रहते हुए लंबे समय तक ऑपरेशन करने में सक्षम पनडुब्बियां भारत की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन के लिए बेहद ज़रूरी मानी जा रही हैं।

Type-214 सबमरीन: क्यों है पसंद

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, भारतीय नौसेना ने जर्मनी की Type-214 Next Generation सबमरीन को प्राथमिकता दी है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका फ्यूल-सेल आधारित AIP सिस्टम है, जो विश्वसनीय माना जाता है। यह तकनीक पनडुब्बी को हफ्तों तक बिना सतह पर आए पानी के भीतर रहने की क्षमता देती है, जिससे उसकी पहचान और ट्रैकिंग बेहद मुश्किल हो जाती है। उच्च खतरे वाले समुद्री क्षेत्रों में यही stealth और endurance निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी का संकेत

अहमदाबाद में प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज़ की बैठक के दौरान दोनों देशों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग को मज़बूत करने के लिए Declaration of Intent पर हस्ताक्षर किए। जर्मनी ने भारत के साथ संयुक्त विकास और उत्पादन को बढ़ाने की इच्छा जताई है, जो भविष्य में रक्षा क्षेत्र में गहरे रणनीतिक सहयोग का संकेत है।

कुल मिलाकर, Project-75I न सिर्फ भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने वाला कार्यक्रम है, बल्कि यह भारत की बदलती सुरक्षा चुनौतियों, आत्मनिर्भर रक्षा नीति और वैश्विक रणनीतिक साझेदारियों की दिशा को भी दर्शाता है।

 

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