भारत और चीन के बीच संबंधों में एक नया मोड़ आया है। चीन ने भरोसा दिलाया है कि वह भारत की उर्वरक, रेयर अर्थ खनिज और टनल बोरिंग मशीनों की जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा। यह आश्वासन चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अपने भारतीय समकक्ष डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात के दौरान दिया।
दो दिन की इस यात्रा में दोनों नेताओं के बीच आर्थिक व व्यापारिक मुद्दों, धार्मिक यात्राओं, नदियों का डाटा साझा करने, सीमा व्यापार और आपसी सहयोग जैसे कई अहम विषयों पर चर्चा हुई।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत–चीन जैसे बड़े पड़ोसी देशों के बीच रिश्ते बहुआयामी हैं। उन्होंने जोर दिया कि व्यापार में बाधाएं और प्रतिबंधात्मक नीतियां टालनी चाहिए, क्योंकि स्थिर और सकारात्मक संबंध न सिर्फ दोनों देशों बल्कि पूरी दुनिया के लिए लाभकारी होंगे।
विदेश मंत्री का संदेश:
- “फर्क को विवाद नहीं बनने देना चाहिए और प्रतिस्पर्धा को संघर्ष में नहीं बदलना चाहिए।”
- वांग यी की यात्रा को उन्होंने रिश्तों की समीक्षा और वैश्विक हालात पर संवाद का अवसर बताया।
गौरतलब है कि 2020 में पूर्वी लद्दाख की एलएसी पर चीनी गतिविधियों के कारण रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। हालांकि हाल के महीनों में तनाव कम करने और गश्त को लेकर समझौते हुए हैं।
इस बीच, यूक्रेन युद्ध और अमेरिकी व्यापार शुल्कों के दौर में भारत ने साफ कहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाना बेहद जरूरी है।
🔹 ताइवान पर भारत का रुख
भारत ने दोहराया कि ताइवान पर उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं है। भारत का ताइवान के साथ रिश्ता केवल आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग तक सीमित है और इसे जारी रखा जाएगा।





