उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बुधवार को कहा कि भारत का समुद्री क्षेत्र दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के देश के दृष्टिकोण में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज भारत एक उभरती हुई समुद्री शक्ति के रूप में खड़ा है, जो वैश्विक समुद्री पहलों का नेतृत्व करने के लिए अपनी भौगोलिक स्थिति और उन्नत बुनियादी ढांचे का रणनीतिक रूप से लाभ उठा रहा है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपनी समुद्री अर्थव्यवस्था को रणनीतिक रूप से विकसित कर रहा है, आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के लिए सतत समुद्री संसाधन उपयोग पर जोर दे रहा है। सरकार का सागरमाला कार्यक्रम बंदरगाहों को औद्योगिक समूहों के साथ एकीकृत करता है, लॉजिस्टिक नेटवर्क को अनुकूलित करता है, व्यापक तटीय विकास को बढ़ावा देता है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि तटीय नौवहन विधेयक 2024 विनियामक ढांचे को सुव्यवस्थित करता है और बहु-मोडल व्यापार संपर्क को बढ़ाता है। 11 देशों के प्रतिनिधियों समेत प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उन्होंने आगे कहा कि आधुनिक भारत में 7,500 किलोमीटर की तटरेखा, 13 प्रमुख बंदरगाह और 200 गैर-प्रमुख बंदरगाह हैं जो इसे निर्विवाद समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करते हैं।उन्होंने कहा, हमारे बंदरगाह की 1,200 मिलियन टन कार्गो की वार्षिक हैंडलिंग क्षमता हमारे आर्थिक परिदृश्य में समुद्री क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है। समुद्री क्षेत्र भारत के व्यापार की असाधारण 95 प्रतिशत मात्रा की सुविधा प्रदान करता है, और यह हमारे रणनीतिक हिंद महासागर की स्थिति का लाभ उठाते हुए इसके मूल्य का 70 प्रतिशत हिस्सा है। उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि आईएमएफ, विश्व बैंक और विश्व आर्थिक मंच जैसी वैश्विक संस्थाएं भारत को निवेश और अवसर के लिए पसंदीदा गंतव्य मानती हैं।
भारत को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में समुद्री क्षेत्र की होगी अहम भूमिका : जगदीप धनखड़





