वाशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने सख्त तेवरों से भारत की चिंता बढ़ा दी है। ट्रंप ने रूस से कच्चे तेल का आयात जारी रखने को लेकर भारत को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि यह व्यापार बंद नहीं हुआ, तो वे भारत से आने वाले सामानों पर आयात शुल्क (Import Tariffs) में भारी बढ़ोतरी कर सकते हैं। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भरता बढ़ा चुका है।
ट्रंप की नाराजगी की मुख्य वजह
डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि भारत द्वारा रूस से तेल खरीदना अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव को कम कर रहा है।
- प्रतिबंधों का उल्लंघन: ट्रंप ने कहा कि जब पूरा पश्चिम रूस को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिश कर रहा है, तब भारत जैसे मित्र देश का रूस के साथ व्यापार जारी रखना स्वीकार्य नहीं है।
- ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति: ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जो देश अमेरिकी हितों के विरुद्ध काम करेंगे, उन्हें अमेरिकी बाजार तक आसान पहुंच नहीं दी जाएगी।
- टैरिफ को हथियार बनाना: ट्रंप ने संकेत दिया कि वे भारतीय उत्पादों पर 10% से 20% तक का अतिरिक्त टैरिफ लगा सकते हैं, जिससे भारतीय निर्यात (जैसे आईटी सेवाएं, कपड़ा और दवाइयां) महंगे हो जाएंगे।
भारत का पक्ष: राष्ट्रीय हित सर्वोपरि
भारत सरकार ने पूर्व में भी इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट किया है। विदेश मंत्रालय का तर्क रहा है कि:
- भारत अपनी विशाल आबादी के लिए सस्ती ऊर्जा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
- रूस से तेल खरीदना किसी भी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं है और यह पूरी तरह से देश की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) से जुड़ा मामला है।
- यूरोपीय देशों की तुलना में भारत द्वारा रूस से खरीदा जाने वाला तेल अभी भी काफी कम है।
वैश्विक बाजार और अर्थव्यवस्था पर असर
यदि ट्रंप अपनी इस धमकी को हकीकत में बदलते हैं, तो इसके परिणाम दूरगामी हो सकते हैं:
- व्यापार युद्ध (Trade War): भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों में खटास आ सकती है, जिसका असर द्विपक्षीय व्यापार (जो 190 बिलियन डॉलर से अधिक है) पर पड़ेगा।
- सप्लाई चेन में बाधा: भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा।
- रूस-भारत संबंधों में मजबूती: अमेरिकी दबाव भारत को सामरिक रूप से रूस के और करीब ले जा सकता है।
आगे की राह
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप अक्सर बातचीत की मेज पर ऊपरी हाथ (Upper Hand) पाने के लिए इस तरह की बयानबाजी करते हैं। भारत के लिए चुनौती यह होगी कि वह कैसे अपनी स्वायत्त विदेश नीति और अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखता है।





