नई दिल्ली: भारत अपनी रक्षा प्रणाली को एक नए और अत्याधुनिक स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहा है। सीमाओं पर बढ़ते तनाव और दुश्मन के ड्रोन्स व मिसाइलों के खतरों को देखते हुए, भारत अब अपने प्रमुख रणनीतिक ठिकानों और बड़े शहरों को ‘आयरन डोम’ (Iron Dome) जैसी सुरक्षा देने जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अपनी स्वदेशी तकनीक और विदेशी सहयोग के तालमेल से एक ऐसी बहुस्तरीय हवाई रक्षा प्रणाली (Multi-layered Air Defence System) विकसित कर रहा है, जो दुश्मन के किसी भी हमले को हवा में ही नेस्तनाबूद करने में सक्षम होगी। इस कदम के बाद दिल्ली, मुंबई जैसे महानगर और परमाणु संस्थान पूरी तरह ‘अभेद्य’ हो जाएंगे।
क्या है आयरन डोम और यह कैसे काम करता है?
इजरायल की प्रसिद्ध रक्षा प्रणाली ‘आयरन डोम’ की तर्ज पर भारत जिस तकनीक पर काम कर रहा है, उसकी कार्यप्रणाली बेहद सटीक है:
- डिटेक्शन (पता लगाना): इसमें लगे हाई-टेक रडार दुश्मन की मिसाइल, रॉकेट या ड्रोन के लॉन्च होते ही उसे ट्रैक कर लेते हैं।
- प्रेडिक्शन (अनुमान): सिस्टम का कंट्रोल यूनिट तुरंत यह गणना करता है कि हमलावर मिसाइल कहां गिरने वाली है। यदि वह किसी रिहायशी या रणनीतिक क्षेत्र की ओर बढ़ रही हो, तभी इंटरसेप्टर मिसाइल दागी जाती है।
- डिस्ट्रक्शन (तबाही): इसकी इंटरसेप्टर मिसाइल दुश्मन के रॉकेट को बीच हवा में ही टक्कर मारकर धमाके के साथ नष्ट कर देती है।
भारतीय ‘आयरन डोम’ की मुख्य खासियतें
भारत की यह प्रस्तावित रक्षा प्रणाली कई मायनों में दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों को टक्कर देगी:
- स्वदेशी तकनीक का दम: भारत का डीआरडीओ (DRDO) ‘कुशा’ (Project Kusha) जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है, जो लंबी दूरी तक दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम होगा।
- हर मौसम में मार: यह सिस्टम दिन हो या रात, कोहरा हो या बारिश, हर परिस्थिति में 24 घंटे सक्रिय रहकर सुरक्षा प्रदान करता है।
- एक साथ कई हमले नाकाम: यह प्रणाली एक साथ आने वाले कई रॉकेट्स और ड्रोन्स को पहचानने और उन्हें अलग-अलग दिशाओं में निशाना बनाने की क्षमता रखती है।
रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा सर्वोपरि
सरकार ने इस प्रणाली के माध्यम से कुछ विशेष क्षेत्रों को सुरक्षा घेरे में लेने का प्लान बनाया है:
- महानगरों की सुरक्षा: दिल्ली और मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहरों को हवाई हमलों और आतंकी ड्रोन हमलों से सुरक्षित करना।
- सैन्य और परमाणु केंद्र: देश के महत्वपूर्ण सैन्य अड्डों, एयरफोर्स स्टेशन्स और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बनाना।
- सीमावर्ती क्षेत्र: पाकिस्तान और चीन से लगी सीमाओं पर संवेदनशील ठिकानों की सुरक्षा को और पुख्ता करना।





