कभी भारत की सड़कों पर भटकने वाला एक परित्यक्त कुत्ता आज शांति, करुणा और एकता का वैश्विक प्रतीक बन चुका है। ‘अलोका’ नाम का यह कुत्ता बौद्ध भिक्षुओं के साथ महाद्वीपों के पार पदयात्रा कर रहा है और वर्तमान में अमेरिका में 2,300 मील की शांति यात्रा पर है।
भारतीय पैरिया नस्ल का माना जाने वाला यह कुत्ता पहली बार उस समय चर्चा में आया, जब भारत में बौद्ध भिक्षुओं का एक समूह 112 दिनों की शांति पदयात्रा पर निकला था। इसी दौरान एक आवारा कुत्ता अचानक भिक्षुओं के साथ चलने लगा। ऐसा प्रतीत हुआ मानो उसने उन्हें ही अपना नया परिवार चुन लिया हो। भिक्षुओं ने उसका नाम रखा—अलोका, जिसका अर्थ होता है ‘प्रकाश’।
दुर्घटना और बीमारी के बावजूद नहीं छोड़ा साथ
इस पदयात्रा के दौरान अलोका एक सड़क दुर्घटना का शिकार हुआ और बाद में गंभीर रूप से बीमार भी पड़ गया। उसकी हालत को देखते हुए भिक्षुओं ने उसे कठिन पैदल यात्रा से कुछ समय के लिए राहत देने के उद्देश्य से एक ट्रक में बैठाने का निर्णय लिया।
हालांकि, अलोका ट्रक से कूद पड़ा और दोबारा उसी सड़क पर लौट आया, जहाँ भिक्षु आगे बढ़ रहे थे।
Good News Network की रिपोर्ट के अनुसार, एक बौद्ध भिक्षु ने टिक-टॉक वीडियो में कहा,
“वह पूरे समय हमारे साथ चला। वह एक सच्चा नायक है। वह चलना चाहता था—और यही बात हमें सबसे ज़्यादा प्रेरित करती है।”
अमेरिका में जारी है शांति मिशन
आज अलोका बौद्ध भिक्षुओं के साथ अमेरिका के टेक्सास राज्य में स्थित Huong Dao Vipassana Bhavana, फोर्ट वर्थ से जुड़ा हुआ है। अक्टूबर महीने में 19 बौद्ध भिक्षुओं और उनके इस चारपाया साथी ने फोर्ट वर्थ से वॉशिंगटन डीसी तक 2,300 मील लंबी शांति पदयात्रा शुरू की।
इस यात्रा का उद्देश्य करुणा, शांति और एकता का संदेश फैलाना है।
राजनीतिक और सामाजिक समर्थन
टेक्सास की प्रतिनिधि निकोल कॉलियर ने Star-Telegram से बातचीत में कहा,
“जब मैंने इस 2,300 मील की पदयात्रा के बारे में सुना, तो मैं हैरान रह गई। यह लोगों के दिल और दिमाग को छूती है। आज के समय में जब शोर अक्सर समझ को दबा देता है और विभाजन एकता से ज़्यादा तेज़ लगता है, यह यात्रा समुदाय और अंतर-धार्मिक एकजुटता का सजीव उदाहरण है।”
10 राज्यों से होकर व्हाइट हाउस तक
यह शांति यात्रा अमेरिका के 10 राज्यों से होकर गुज़रेगी और इसके 110 दिनों में पूरी होने की उम्मीद है। यात्रा का समापन फरवरी में वॉशिंगटन डीसी में होना प्रस्तावित है।
दिसंबर के अंत तक यह समूह अटलांटा तक पहुँच चुका था।
भिक्षुओं की यह यात्रा फेसबुक पर लाइव ट्रैक की जा रही है, जबकि सोशल मीडिया पर नियमित अपडेट साझा किए जा रहे हैं। अलोका—‘द पीस डॉग’ का अपना अलग इंस्टाग्राम अकाउंट भी है, जहाँ उसकी यात्रा को लाखों लोग फॉलो कर रहे हैं।
“कदम-दर-कदम शांति की ओर”
Walk for Peace के आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज पर कहा गया है,
“यह यात्रा ज्ञात और अज्ञात दोनों तरह की चुनौतियों से भरी है। लेकिन शांत हृदय और दृढ़ उद्देश्य के साथ भिक्षु कदम-दर-कदम आगे बढ़ रहे हैं, शांति, सहनशीलता और अडिग संकल्प का प्रतीक बनते हुए।”
अलोका की यह यात्रा आज दुनिया को यह संदेश दे रही है कि शांति केवल शब्दों या भाषणों से नहीं, बल्कि कर्म, करुणा और साथ चलने की भावना से बनती है।




