Tuesday, February 10, 2026

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‘भारत की प्रगति रोकने की साजिश’: तेल खरीद पर अमेरिका की दखलंदाजी पर भड़का रूस; पश्चिमी दबाव को बताया ‘आर्थिक दादागिरी

मॉस्को/नई दिल्ली: रूस ने भारत को तेल निर्यात करने के मामले में अमेरिका और पश्चिमी देशों के हस्तक्षेप पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति कार्यालय) ने कड़े शब्दों में कहा है कि अमेरिका अपने प्रतिबंधों का डर दिखाकर भारत जैसे संप्रभु देश को रूस से तेल खरीदने से रोकने की कोशिश कर रहा है, जो सीधे तौर पर ‘भारत की ऊर्जा सुरक्षा और विकास को रोकने की साजिश’ है। रूस का यह बयान उन रिपोर्ट्स के बाद आया है जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिका भारतीय रिफाइनरियों पर रूसी तेल की कीमतों और शिपिंग को लेकर दबाव बना रहा है।

रूस का कड़ा प्रहार: ‘प्रतिबंध नहीं, यह ब्लैकमेलिंग है’

रूसी विदेश मंत्रालय और शीर्ष अधिकारियों ने वैश्विक मंच पर अपनी बात रखते हुए अमेरिका पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं:

  • सस्ते तेल का अधिकार: रूस ने तर्क दिया कि भारत अपने राष्ट्रीय हित में सस्ता कच्चा तेल खरीद रहा है ताकि अपनी जनता को महंगाई से बचा सके। अमेरिका द्वारा इसमें अड़ंगा डालना भारतीय अर्थव्यवस्था के साथ खिलवाड़ है।
  • अनुचित दबाव: रूस का दावा है कि अमेरिका ‘प्राइस कैप’ (कीमतों की सीमा) और लॉजिस्टिक्स के नियमों का हवाला देकर वैश्विक तेल बाजार में एकाधिकार (Monopoly) स्थापित करना चाहता है।
  • भारत-रूस संबंधों में दरार की कोशिश: रूसी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन जानबूझकर नई दिल्ली और मॉस्को के दशकों पुराने रणनीतिक संबंधों में दरार पैदा करने की कोशिश कर रहा है।

क्यों अहम है भारत के लिए रूसी तेल?

यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत और रूस के बीच तेल व्यापार में अभूतपूर्व उछाल आया है, जिसे नीचे दिए गए बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  1. आर्थिक बचत: रूस से मिलने वाले डिस्काउंट (छूट) के कारण भारत ने पिछले दो वर्षों में अरबों डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार की बचत की है।
  2. आपूर्ति की स्थिरता: मध्य-पूर्व के देशों पर निर्भरता कम करते हुए रूस अब भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता (Supplier) बन गया है।
  3. स्थानीय मुद्रा में व्यापार: दोनों देश डॉलर के प्रभुत्व को कम करने के लिए रुपया-रुबल व्यापार को बढ़ावा देने पर काम कर रहे हैं, जिससे अमेरिका चिंतित है।

अमेरिका की आपत्ति और भारत का संतुलित रुख

अमेरिका का तर्क है कि भारत द्वारा खरीदे जा रहे तेल से रूस को जो राजस्व मिलता है, उसका उपयोग वह युद्ध के लिए कर रहा है। हालांकि, भारत ने हमेशा अपना रुख स्पष्ट रखा है:

  • राष्ट्रीय हित सर्वोपरि: भारतीय विदेश मंत्रालय ने बार-बार कहा है कि भारत की प्राथमिकता अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है और वह किसी भी देश के दबाव में आकर फैसले नहीं लेगा।
  • वैश्विक तेल कीमतों पर असर: भारत का मानना है कि यदि वह रूस से तेल खरीदना बंद कर देता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिससे पूरी दुनिया में भारी महंगाई आएगी।

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