जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान द्वारा घोषित दो सप्ताह के युद्ध विराम (Ceasefire) का भारत ने न केवल स्वागत किया है, बल्कि अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम भी उठाए हैं। बुधवार को सीजफायर की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर भारत सरकार ने तेहरान (ईरान) से संपर्क साधा है। इस कूटनीतिक पहल का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पश्चिमी हिस्से में फंसे भारत के 16 महत्वपूर्ण तेल और गैस जहाजों को सुरक्षित स्वदेश लाना है।
‘होर्मुज’ में नौवहन की स्वतंत्रता पर भारत का जोर
विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर सीजफायर का समर्थन किया और क्षेत्र में शांति बहाली की उम्मीद जताई।
- कूटनीति की जीत: भारत ने स्पष्ट किया कि वह शुरू से ही संघर्ष को कम करने के लिए ‘संवाद और कूटनीति’ (Dialogue and Diplomacy) की वकालत करता रहा है। मंत्रालय के अनुसार, चल रहे संघर्ष को समाप्त करने का यही एकमात्र स्थायी रास्ता है।
- वैश्विक वाणिज्य की बहाली: भारत ने उम्मीद जताई है कि युद्ध विराम के बाद अब होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बिना किसी बाधा के शुरू होगी। यह जलमार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाता है, जो पिछले कुछ समय से तनाव के कारण बाधित था।
फंसे हुए जहाजों को लाने की तैयारी शुरू
तनाव के चरम पर होने के दौरान भारत के कई विशाल टैंकर सुरक्षा कारणों से बीच समुद्र में ही रुक गए थे।
- ऊर्जा सुरक्षा की प्राथमिकता: भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है। इन 16 जहाजों के स्वदेश लौटने से घरेलू बाजार में ईंधन की आपूर्ति और कीमतों में स्थिरता आने की संभावना है।
- नौसेना की निगरानी: सूत्रों के अनुसार, भारतीय नौसेना के युद्धपोत भी क्षेत्र में तैनात हैं, जो इन व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित गलियारा (Safe Passage) प्रदान करने के लिए ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहे हैं।
वैश्विक प्रभाव और मानवीय संकट पर चिंता
भारत ने अपने बयान में युद्ध के कारण हो रही मानवीय पीड़ा और वैश्विक अर्थव्यवस्था को पहुँच रहे नुकसान पर भी गहरा दुख व्यक्त किया है।
“इस संघर्ष ने न केवल लोगों को अपार पीड़ा पहुँचाई है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार नेटवर्क को भी गंभीर रूप से बाधित किया है। हम उम्मीद करते हैं कि यह युद्ध विराम पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में पहला कदम साबित होगा।” — विदेश मंत्रालय, भारत





