नई दिल्ली/ब्राजीलिया: भारत और ब्राजील ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई देते हुए ऊर्जा, तकनीक और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लुला डी सिल्वा के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रक्षा उत्पादन और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया है। इस मुलाकात ने न केवल दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को मजबूती दी है, बल्कि ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) के दो बड़े देशों के रूप में उनके वैश्विक प्रभाव को भी रेखांकित किया है।
प्रमुख समझौते और सहयोग के क्षेत्र
दोनों देशों के बीच हुए समझौतों का दायरा काफी व्यापक है, जो भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं:
- क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals): भारत और ब्राजील ने लिथियम और कोबाल्ट जैसे दुर्लभ खनिजों की खोज और खनन के लिए हाथ मिलाया है। इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए ये खनिज बेहद अनिवार्य हैं।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल गवर्नेंस: दोनों देशों ने एआई के नैतिक उपयोग और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (DPI) को साझा करने पर सहमति जताई है। इससे दोनों देशों के स्टार्टअप्स और तकनीकी क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा।
- रक्षा और सुरक्षा: रक्षा क्षेत्र में सह-उत्पादन और संयुक्त सैन्य अभ्यास को लेकर बातचीत आगे बढ़ी है। ब्राजील की रक्षा कंपनियों ने भारत के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम में गहरी रुचि दिखाई है।
- ऊर्जा और जैव ईंधन: इथेनॉल उत्पादन में ब्राजील की विशेषज्ञता और भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के बीच ‘ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस’ को और मजबूत करने पर सहमति बनी है।
वैश्विक मंच पर ‘ग्लोबल साउथ’ का नेतृत्व
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति लुला ने वैश्विक भू-राजनीति पर भी चर्चा की। दोनों नेताओं ने जी-20 (G20) की अध्यक्षता के अनुभवों को साझा किया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों की मांग को दोहराया।
- साझा चुनौतियां: दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन, गरीबी उन्मूलन और खाद्य सुरक्षा जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए एक साझा मंच तैयार करने पर जोर दिया।
- व्यापारिक लक्ष्य: वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापारिक संतुलन को और बेहतर बनाने और द्विपक्षीय व्यापार को $20$ बिलियन डॉलर के पार ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
स्वास्थ्य और कृषि में नई पहल
समझौतों के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र में ‘फार्मास्युटिकल’ सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि सस्ती दवाएं दोनों देशों के नागरिकों को मिल सकें। वहीं, कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और दालों के व्यापार को लेकर भी नई राहें खोली गई हैं।





