यरूशलेम/नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को एक नई ऊँचाई मिली है। प्रधानमंत्री मोदी और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में रक्षा, नवाचार, जल प्रबंधन और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कई बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के वैश्विक खतरे पर साझा चिंता व्यक्त करते हुए इस बुराई के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का संकल्प दोहराया। इस मुलाकात को मध्य-पूर्व और दक्षिण एशिया के समीकरणों के लिहाज से ‘गेम-चेंजर’ माना जा रहा है।
बैठक के मुख्य आकर्षण: आतंकवाद पर कड़ा प्रहार
दोनों प्रधानमंत्रियों ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में आतंकवाद को लेकर दुनिया को एक कड़ा संदेश दिया:
- शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance): पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इजरायल दोनों ही लंबे समय से आतंकवाद का दंश झेल रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभ्य समाज में आतंक के लिए कोई स्थान नहीं है और दोनों देश खुफिया जानकारी साझा करने (Intelligence Sharing) में सहयोग बढ़ाएंगे।
- रणनीतिक तालमेल: नेतन्याहू ने भारत को इजरायल का ‘सबसे करीबी दोस्त’ बताते हुए कहा कि हम अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक और सैन्य सहयोग को और मजबूत करेंगे।
प्रमुख समझौतों पर एक नजर
दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच हुए समझौतों में भविष्य की चुनौतियों का समाधान छिपा है:
- रक्षा और साइबर सुरक्षा: इजरायल भारत को मिसाइल डिफेंस सिस्टम और उन्नत ड्रोन तकनीक देने के साथ-साथ ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में ही निर्माण के लिए राजी हुआ है। साइबर हमलों से निपटने के लिए एक ‘ज्वाइंट टास्क फोर्स’ बनाने पर सहमति बनी।
- कृषि और जल प्रबंधन: इजरायल की विश्व प्रसिद्ध ‘ड्रिप इरिगेशन’ (बूंद-बूंद सिंचाई) तकनीक और खारे पानी को पीने योग्य बनाने के प्रोजेक्ट्स पर समझौता हुआ है। इससे भारतीय किसानों की आय दोगुनी करने में मदद मिलेगी।
- अंतरिक्ष अनुसंधान: भारत का ‘इसरो’ (ISRO) और इजरायल की अंतरिक्ष एजेंसी मिलकर छोटे उपग्रहों (Miniature Satellites) और परमाणु घड़ी की तकनीक पर काम करेंगे।
द्विपक्षीय संबंधों का मानवीय चेहरा
पीएम मोदी ने इस दौरान न केवल औपचारिक बैठकें कीं, बल्कि भारतीय मूल के यहूदियों और वहां रह रहे भारतीयों से भी संवाद किया:
- सांस्कृतिक जुड़ाव: प्रधानमंत्री ने इजरायल में भारतीय समुदाय के योगदान की सराहना की और उन्हें भारत के विकास में भागीदार बनने का निमंत्रण दिया।
- व्यक्तिगत केमिस्ट्री: नेतन्याहू और मोदी की ‘कार डिप्लोमेसी’ और अनौपचारिक बातचीत ने यह संदेश दिया कि दोनों देशों के बीच संबंध अब केवल फाइलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह दो नेताओं और दो संस्कृतियों का गहरा मेल है।





