Wednesday, February 11, 2026

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भारत-अमेरिका व्यापारिक डील की नई फैक्टशीट: दालों पर शुल्क घटा, 500 बिलियन डॉलर के व्यापार का लक्ष्य; जानें खेती और बाजार पर क्या होगा असर

नई दिल्ली/वाशिंगटन: भारत और अमेरिका ने अपने द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाते हुए एक संशोधित ‘ट्रेड फैक्टशीट’ जारी की है। इस समझौते में सबसे अधिक चर्चा 500 बिलियन डॉलर (आधे ट्रिलियन डॉलर) के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य और कृषि उत्पादों, विशेषकर दालों पर आयात शुल्क में किए गए बदलावों की है। इस सौदे को जहां केंद्र सरकार ‘आर्थिक रणनीतिक साझेदारी’ बता रही है, वहीं विशेषज्ञ इसके घरेलू कृषि बाजार पर पड़ने वाले दूरगामी प्रभावों का विश्लेषण कर रहे हैं।

दालों और कृषि उत्पादों पर ‘टैरिफ़’ का नया गणित

समझौते के तहत अमेरिका से आने वाले कृषि उत्पादों पर लगे अतिरिक्त शुल्कों को तर्कसंगत बनाया गया है:

  • दालों पर रियायत: भारत ने अमेरिका से आयात होने वाली मसूर (Lentils), चने और कुछ अन्य दालों पर लगाए गए अतिरिक्त प्रतिशोधात्मक शुल्क (Retaliatory Tariffs) को हटाने या कम करने पर सहमति दी है। यह शुल्क 2019 में अमेरिका द्वारा भारतीय स्टील पर लगाए गए टैरिफ के जवाब में लगाया गया था।
  • सेब और बादाम: दालों के साथ-साथ अमेरिकी सेब, बादाम और अखरोट पर भी शुल्क कम किए गए हैं। इससे भारतीय बाजारों में इन विदेशी उत्पादों की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतें कम हो सकती हैं।
  • घरेलू चिंता: भारतीय किसानों और किसान संगठनों ने चिंता जताई है कि सस्ता अमेरिकी माल आने से स्थानीय फसलों के दाम गिर सकते हैं।

500 बिलियन डॉलर का ‘परचेज क्लॉज’ और लक्ष्य

दोनों देशों ने अपने व्यापारिक रिश्तों को एक नई दिशा देने के लिए एक महात्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है:

  1. ऐतिहासिक लक्ष्य: भारत और अमेरिका ने अगले कुछ वर्षों में आपसी व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में यह लगभग 190-200 बिलियन डॉलर के आसपास है।
  2. ऊर्जा और डिफेंस: इस खरीद क्लॉज में भारत द्वारा अमेरिका से बड़ी मात्रा में तरल प्राकृतिक गैस (LNG), कच्चे तेल और उन्नत रक्षा उपकरणों की खरीद शामिल है।
  3. सप्लाई चेन: अमेरिका अब चीन पर निर्भरता कम करने के लिए भारत को एक ‘वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग हब’ के रूप में देख रहा है, जिससे भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा क्षेत्र को बड़ा लाभ मिल सकता है।

फैक्टशीट में और क्या-क्या बदला?

नई फैक्टशीट में केवल कृषि ही नहीं, बल्कि तकनीक और वीजा नियमों पर भी चर्चा की गई है:

  • iCET पहल: ‘क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी’ (iCET) के तहत दोनों देश सेमीकंडक्टर, एआई (AI) और अंतरिक्ष अनुसंधान में सहयोग बढ़ाएंगे।
  • टैक्स विवाद सुलझे: कई तकनीकी सेवाओं पर लगने वाले ‘डिजिटल सर्विस टैक्स’ जैसे मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझाने पर सहमति बनी है।
  • बाजार पहुंच (Market Access): भारत ने अपने डेयरी और पोल्ट्री सेक्टर को धीरे-धीरे खोलने का संकेत दिया है, जो लंबे समय से अमेरिका की मांग थी।

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