नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और अमेरिका के बीच संपन्न हुई हालिया ‘मेगा ट्रेड डील’ पर अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए इसे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए एक नया मील का पत्थर बताया है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि इस समझौते से न केवल द्विपक्षीय व्यापार कई गुना बढ़ेगा, बल्कि भारत के युवाओं के लिए ‘बड़े पैमाने पर रोजगार’ के नए अवसर भी पैदा होंगे। पीएम मोदी के अनुसार, यह समझौता भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूती और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
रोजगार और युवाओं पर केंद्रित बयान
प्रधानमंत्री ने इस डील के दूरगामी प्रभावों को रेखांकित करते हुए कहा कि इसके केंद्र में भारत का युवा और उसकी क्षमता है:
- सेक्टरवार लाभ: पीएम ने कहा कि टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में अमेरिकी निवेश से भारत के छोटे और बड़े शहरों में नौकरियों की बाढ़ आएगी।
- MSME को मजबूती: इस समझौते से भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) को ग्लोबल मार्केट तक सीधी पहुँच मिलेगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित होंगे।
- कौशल विकास: प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि समझौते के तहत दोनों देश मिलकर कौशल विकास (Skill Development) के कार्यक्रमों पर भी काम करेंगे, ताकि भारतीय युवाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार किया जा सके।
भारत-अमेरिका साझेदारी: ‘दोस्ती से आगे, वैश्विक कल्याण के लिए’
प्रधानमंत्री ने इस व्यापारिक समझौते को केवल लाभ-हानि का सौदा नहीं, बल्कि दो लोकतांत्रिक देशों के साझा भविष्य का दस्तावेज बताया:
- सप्लाई चेन में भरोसा: पीएम ने कहा कि दुनिया अब भरोसेमंद भागीदारों की तलाश में है और भारत-अमेरिका की यह डील वैश्विक सप्लाई चेन को स्थिरता प्रदान करेगी।
- इनोवेशन का हब: समझौते के तहत ‘क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी’ (iCET) पर जोर दिया गया है, जिससे भारत आने वाले समय में तकनीक का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।
- कम होगा व्यापार घाटा: इस समझौते के बाद भारत के निर्यात में भारी उछाल आने की उम्मीद है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
विपक्ष और विशेषज्ञों का नजरिया
जहाँ सरकार इस डील को गेम-चेंजर बता रही है, वहीं आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत के आईटी और फार्मा सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा होगा। अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों के लिए आसान पहुंच से ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को वैश्विक स्तर पर बड़ी कामयाबी मिल सकती है।





