Wednesday, March 4, 2026

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भारतीय वैज्ञानिकों ने खोजा कोरोना की रीढ़ तोड़ने वाला फार्मूला

कोरोना वायरस के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी सफलता हासिल की हैभारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वैज्ञानिकों ने पुरानी दवा एसबी 431542 को कोरोना वायरस के खिलाफ बेहद प्रभावी एंटीवायरल फार्मूले के रूप में चिन्हित किया है।

विशेष बात यह है कि यह दवा 50 बार के एक्सपोजर के बावजूद वायरस पर इतनी प्रभावी रही कि उसने कोई प्रतिरोधक क्षमता (Resistance) विकसित नहीं की — जो मौजूदा एंटीवायरल दवाओं की सबसे बड़ी चुनौती रही है।

तीन स्तरों पर वायरस को करती है निष्क्रिय

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), पुणे के निदेशक डॉ. नवीन कुमार ने बताया कि यह दवा एक साथ तीन मोर्चों पर वायरस पर हमला करती है:

  1. यह शरीर में TGF-β (टीजीएफ-बीटा) नामक प्रोटीन के रास्ते को रोकती है, जिससे वायरस का कोशिकाओं में प्रवेश रुकता है।
  2. यह वायरस के ORF3a प्रोटीन से चिपककर उसकी असेंबली प्रक्रिया को विफल कर देती है।
  3. यह संक्रमित कोशिकाओं से वायरस के बाहर आने की प्रक्रिया यानी एपोप्टोसिस (Apoptosis) को भी रोक देती है।

ICMR-ICAR और बेल्जियम वैज्ञानिकों की संयुक्त सफलता

इस शोध को ICMR के नेशनल सेंटर फॉर वेटरनरी टाइप कल्चर, NIV, और बेल्जियम के शोधकर्ताओं ने मिलकर अंजाम दिया है। अध्ययन BioRxiv जर्नल में प्री-प्रिंट के रूप में प्रकाशित हुआ है। अभी इसे अंतिम वैज्ञानिक समीक्षा का इंतज़ार है, लेकिन प्रारंभिक निष्कर्ष बेहद आशाजनक माने जा रहे हैं।

कोरोना वायरस के खिलाफ अब तक की सबसे टिकाऊ एंटीवायरल

डॉ. कुमार ने दावा किया कि जब इस दवा को लगातार 50 बार वायरस के संपर्क में लाया गया, तब भी वायरस ने कोई प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं की। यह उपलब्धि रेमडेसिवीर जैसी मौजूदा दवाओं की तुलना में कहीं ज्यादा स्थायित्व प्रदान करती है, क्योंकि वायरस आमतौर पर उनके खिलाफ जल्द प्रतिरोध बना लेता है।

इस दवा का प्रारंभिक परीक्षण चूहे के भ्रूणों पर किया गया, जहां यह चिकन कोरोना वायरस के खिलाफ प्रभावी पाई गई। आगे चलकर यदि यह मानव परीक्षणों में भी सफल होती है, तो यह न केवल कोविड-19 बल्कि अन्य कोरोना वायरस के खिलाफ भी एक क्रांतिकारी हथियार बन सकती है।

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