Wednesday, January 7, 2026

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भारतीय रेलवे की ‘हरित’ पहल: वंदे भारत और शताब्दी में अब नहीं दिखेगा प्लास्टिक, बायोडिग्रेडेबल थालियों में परोसा जाएगा खाना

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए अपनी प्रीमियम ट्रेनों—वंदे भारत और शताब्दी एक्सप्रेस—में एकल उपयोग वाले प्लास्टिक (सिंगल-यूज़ प्लास्टिक) को पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया है। अब इन ट्रेनों में यात्रियों को प्लास्टिक की प्लेटों के बजाय पूरी तरह से ‘बायोडिग्रेडेबल’ और ईको-फ्रेंडली थालियों में भोजन परोसा जाएगा। रेल मंत्रालय का यह फैसला न केवल प्रदूषण को कम करेगा, बल्कि यात्रियों को स्वच्छता का एक नया अनुभव भी देगा।

पर्यावरण की सुरक्षा और नई व्यवस्था

  • प्लास्टिक कचरे पर लगाम: ट्रेनों में प्रतिदिन हजारों की संख्या में प्लास्टिक की प्लेटों और चम्मचों का उपयोग होता है, जो कचरा प्रबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए थे। नई व्यवस्था के तहत अब गन्ने की लुगदी (बैगास), बांस या कागज से बनी उच्च गुणवत्ता वाली थालियों का उपयोग किया जाएगा।
  • प्रीमियम ट्रेनों से शुरुआत: फिलहाल इस योजना को वंदे भारत और शताब्दी जैसी वीआईपी ट्रेनों में अनिवार्य रूप से लागू किया जा रहा है, क्योंकि इन ट्रेनों में खान-पान की सेवाएं टिकट शुल्क का हिस्सा होती हैं और यात्रियों की संख्या भी अधिक रहती है।
  • स्वच्छता और स्वास्थ्य: रेलवे अधिकारियों के अनुसार, बायोडिग्रेडेबल थालियां न केवल पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं, बल्कि गर्म भोजन परोसने के लिए प्लास्टिक की तुलना में स्वास्थ्यवर्धक भी मानी जाती हैं।

आईआरसीटीसी (IRCTC) की नई गाइडलाइंस

रेलवे की खान-पान शाखा IRCTC ने सभी संबंधित वेंडरों और कैटरिंग इकाइयों को नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं:

  1. थाली और चम्मच: केवल प्लेट ही नहीं, बल्कि चम्मच, कटोरी और कप भी अब बायोडिग्रेडेबल सामग्री से बने होंगे।
  2. गुणवत्ता मानक: सुनिश्चित किया जाएगा कि ईको-फ्रेंडली होने के साथ-साथ ये बर्तन भोजन के वजन और तापमान को सहने में सक्षम हों और दिखने में भी प्रीमियम लगें।
  3. कचरा निस्तारण: भोजन के बाद इन थालियों का निस्तारण करना आसान होगा, क्योंकि ये प्राकृतिक रूप से खाद में परिवर्तित हो सकती हैं।

भविष्य की योजना

रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वंदे भारत और शताब्दी में इस प्रयोग की सफलता के बाद, इसे धीरे-धीरे राजधानी, दुरंतो और अन्य एक्सप्रेस ट्रेनों में भी विस्तार दिया जाएगा। रेलवे का लक्ष्य आने वाले वर्षों में अपने पूरे नेटवर्क को ‘प्लास्टिक मुक्त’ बनाना है।

यात्रियों की प्रतिक्रिया

प्रायोगिक तौर पर शुरू की गई इस सेवा को यात्रियों द्वारा काफी सराहा जा रहा है। यात्रियों का मानना है कि ईको-फ्रेंडली बर्तनों में खाना परोसना भारतीय रेल के आधुनिकीकरण और जिम्मेदारी की ओर एक सकारात्मक कदम है।

 

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