Saturday, February 14, 2026

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भारतीय मेधा का वैश्विक डंका: TIME ने माना भारतीय मूल के विशेषज्ञों का लोहा; AI से बनाईं लाखों ‘वर्चुअल दवाएं’, 60 लाख लोगों की बचाई जान

न्यूयॉर्क/नई दिल्ली: विश्व प्रसिद्ध ‘टाइम’ (TIME) मैग्जीन ने अपनी हालिया सूची में भारतीय मूल के स्वास्थ्य विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की एक टीम को विशेष स्थान देते हुए उनके क्रांतिकारी कार्यों की सराहना की है। इन विशेषज्ञों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करते हुए मात्र 6 महीने के भीतर लाखों वर्चुअल दवाएं (डिजिटल मॉलिक्यूल्स) तैयार की हैं। इस तकनीक की मदद से न केवल दवाओं के निर्माण की प्रक्रिया तेज हुई है, बल्कि नशीली दवाओं के बढ़ते संकट और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लगभग 60 लाख लोगों की जान बचाई गई है।

तकनीक का चमत्कार: 6 महीने में लाखों दवाओं का निर्माण

परंपरागत रूप से एक नई दवा को लैब से बाजार तक पहुँचने में वर्षों का समय और अरबों डॉलर खर्च होते हैं, लेकिन इन विशेषज्ञों ने इस धारणा को बदल दिया है:

  • वर्चुअल ड्रग डिस्कवरी: टीम ने सुपरकंप्यूटर और उन्नत AI एल्गोरिदम का उपयोग करके लाखों रासायनिक यौगिकों (Compounds) का डिजिटल परीक्षण किया। इससे यह पता चल सका कि कौन सी दवा किस बीमारी पर सबसे सटीक असर करेगी।
  • अति तीव्र गति: जो काम दशकों में नहीं हो सका, उसे AI की मदद से महज 180 दिनों में कर दिखाया गया। इसमें ऐसी एंटी-ड्रग दवाएं भी शामिल हैं जो नशे की लत छुड़ाने में कारगर साबित हुई हैं।

नशे के खिलाफ जंग: 60 लाख जिंदगियों को मिला नया जीवन

इस खोज का सबसे बड़ा प्रभाव ‘ओपियोइड क्राइसिस’ (नशीली दवाओं का संकट) पर पड़ा है, जो वर्तमान में अमेरिका सहित कई देशों में महामारी का रूप ले चुका है:

  1. ओवरडोज से बचाव: विशेषज्ञों द्वारा विकसित डिजिटल दवाओं ने ओवरडोज के शिकार मरीजों के उपचार में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है।
  2. सस्ती और सुलभ चिकित्सा: वर्चुअल तकनीक के कारण दवाओं के शोध की लागत में भारी कमी आई है, जिससे ये जीवनरक्षक दवाएं आम जनता के लिए सस्ती हो गई हैं।
  3. टाइम का सम्मान: टाइम मैग्जीन ने इन विशेषज्ञों को ‘हेल्थकेयर इनोवेटर्स’ की श्रेणी में रखते हुए कहा कि इनकी खोज ने चिकित्सा विज्ञान के भविष्य को नई दिशा दी है।

भारतीय विशेषज्ञों का वर्चस्व: ग्लोबल लीडर के रूप में भारत

यह उपलब्धि एक बार फिर साबित करती है कि वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान निकालने में भारतीय मूल के वैज्ञानिकों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है:

  • डेटा और विज्ञान का संगम: सम्मानित विशेषज्ञों में शामिल वैज्ञानिकों ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा समझ और पश्चिमी तकनीक के डेटा का अद्भुत मेल तैयार किया है।
  • भविष्य की तैयारी: इस सफलता के बाद अब कैंसर और अल्जाइमर जैसी लाइलाज बीमारियों के लिए भी इसी ‘वर्चुअल ड्रग’ मॉडल पर काम शुरू कर दिया गया है।

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