Thursday, March 5, 2026

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“भारतीय बंदरगाहों का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं कर रहा US”; विदेश मंत्रालय ने अफवाहों को किया सिरे से खारिज

नई दिल्ली: भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने उन अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों और दावों का पुरजोर खंडन किया है, जिनमें कहा जा रहा था कि अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए भारतीय बंदरगाहों (Ports) का उपयोग कर रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक प्रेस वार्ता के दौरान स्पष्ट किया कि भारत की धरती या उसके किसी भी रणनीतिक बंदरगाह से ईरान पर मिसाइलें दागने या ड्रोन हमले करने की खबरें पूरी तरह निराधार और भ्रामक हैं। भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय शांति के सिद्धांतों से समझौता नहीं करेगा और किसी भी तीसरे देश को अपनी जमीन का इस्तेमाल युद्ध के लिए करने की अनुमति नहीं देगा।

विवाद की जड़: आखिर क्या थे अमेरिकी मीडिया के दावे?

पिछले कुछ दिनों से पश्चिमी मीडिया और कुछ रक्षा विश्लेषकों के बीच यह चर्चा तेज थी कि:

  • लॉजिस्टिक सपोर्ट: अमेरिका और भारत के बीच हुए सैन्य लॉजिस्टिक समझौते (LEMOA) के तहत अमेरिकी नौसेना के जहाज भारतीय तटों पर ईंधन भरने और मरम्मत के लिए रुके हैं।
  • मिसाइल लॉन्च की अफवाह: सोशल मीडिया पर कुछ अपुष्ट सूत्रों ने दावा किया था कि अरब सागर में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों ने भारतीय रडार और बंदरगाह सुविधाओं का उपयोग कर ईरान की ओर मिसाइलें दागी हैं।
  • ईरान की चिंता: इन अफवाहों के बाद खाड़ी देशों में भारत की ‘तटस्थ’ छवि को लेकर सवाल उठने लगे थे, जिस पर लगाम लगाना भारत के लिए कूटनीतिक रूप से अनिवार्य हो गया था।

विदेश मंत्रालय का कड़ा रुख: “भारत युद्ध का हिस्सा नहीं”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति साफ की है:

  1. अफवाहों का खंडन: प्रवक्ता ने कहा कि भारत के किसी भी सैन्य या नागरिक बंदरगाह का इस्तेमाल किसी भी आक्रामक सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं किया गया है।
  2. रणनीतिक स्वायत्तता: भारत अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) पर कायम है। हम किसी भी देश के खिलाफ सैन्य गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं।
  3. ईरान के साथ संबंध: भारत और ईरान के ऐतिहासिक और मधुर संबंध हैं। चाबहार बंदरगाह जैसी परियोजनाओं के माध्यम से दोनों देश जुड़े हुए हैं, ऐसे में भारत अपनी धरती का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ कभी नहीं होने देगा।

LEMOA समझौते की सच्चाई: केवल शांति और लॉजिस्टिक के लिए

MEA ने साफ किया कि अमेरिका के साथ हुए पुराने रक्षा समझौतों का अर्थ ‘युद्ध में भागीदारी’ नहीं है:

  • ईंधन और राशन: भारत और अमेरिका के बीच जो समझौते हैं, वे केवल मानवीय सहायता, आपदा राहत और शांति काल में ईंधन व रडार मरम्मत तक सीमित हैं।
  • रक्षा नियमों का पालन: किसी भी विदेशी युद्धपोत को भारतीय सीमा में प्रवेश करने से पहले कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल और अनुमति से गुजरना पड़ता है। आक्रामक हथियारों के इस्तेमाल की अनुमति भारत का कानून नहीं देता।

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