वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की वापसी के साथ ही भारतीय आईटी पेशेवरों और कुशल कामगारों की मुश्किलें बढ़नी शुरू हो गई हैं। अमेरिकी दूतावास और वाणिज्य दूतावासों में वीजा इंटरव्यू के लिए प्रतीक्षा समय (Waiting Period) अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुँच गया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, एच-1बी (H-1B) और एल-1 (L-1) जैसे वर्क वीजा के लिए भारत में इंटरव्यू स्लॉट वर्ष 2027 तक के लिए खत्म हो गए हैं। इस स्थिति ने न केवल हजारों भारतीय पेशेवरों के करियर को अधर में लटका दिया है, बल्कि उन कंपनियों के लिए भी संकट पैदा कर दिया है जो भारतीय प्रतिभाओं पर निर्भर हैं।
वीजा स्लॉट का अकाल: क्या है वर्तमान स्थिति?
अमेरिका जाने की इच्छा रखने वाले भारतीय इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए वीजा अपॉइंटमेंट मिलना अब एक ‘दुःस्वप्न’ जैसा हो गया है।
- लंबा इंतजार: दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े केंद्रों पर वर्क वीजा इंटरव्यू के लिए औसत प्रतीक्षा समय 500 से 800 दिनों के पार चला गया है।
- नई नियुक्तियों पर ब्रेक: कई भारतीय आईटी कंपनियों ने नए प्रोजेक्ट्स के लिए पेशेवरों को अमेरिका भेजना बंद कर दिया है क्योंकि उन्हें अगले दो साल तक का कोई स्लॉट नहीं मिल रहा है।
ट्रंप प्रशासन की सख्ती का असर
नवनिर्वाचित ट्रंप प्रशासन ने अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत वीजा नियमों को और अधिक कड़ा कर दिया है।
- सख्त जांच प्रक्रिया: अब हर आवेदन की अधिक गहराई से जांच की जा रही है, जिससे प्रति व्यक्ति इंटरव्यू का समय बढ़ गया है और प्रतिदिन होने वाले साक्षात्कारों की संख्या कम हो गई है।
- इन-पर्सन इंटरव्यू अनिवार्य: प्रशासनिक सुधारों के नाम पर कई श्रेणियों में ‘ड्रॉप बॉक्स’ (बिना इंटरव्यू के वीजा रिन्यूअल) की सुविधा को सीमित किया गया है, जिससे दूतावासों पर बोझ बढ़ गया है।
भारतीय आईटी क्षेत्र में खलबली
भारत का ₹15 लाख करोड़ से अधिक का आईटी निर्यात काफी हद तक ऑन-साइट काम पर निर्भर है।
- प्रोजेक्ट्स में देरी: प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी विशेषज्ञों का समय पर अमेरिका न पहुँच पाना कंपनियों के लिए वित्तीय नुकसान का कारण बन रहा है।
- थर्ड-कंट्री रूट: स्लॉट न मिलने के कारण कई पेशेवर अब वियतनाम, थाईलैंड या अन्य देशों के अमेरिकी दूतावासों में इंटरव्यू देने पर विचार कर रहे हैं, जो काफी महंगा और अनिश्चित है।
विशेषज्ञों की राय और छात्रों की चिंता
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो भारतीय प्रतिभाएं अमेरिका के बजाय कनाडा या जर्मनी जैसे देशों का रुख कर सकती हैं। वहीं, अमेरिका में पढ़ाई पूरी कर चुके भारतीय छात्र, जो ओपिटी (OPT) के बाद वर्क वीजा में स्विच करना चाहते हैं, उनके सामने देश छोड़ने का खतरा मंडराने लगा है क्योंकि उनके पास इंटरव्यू के लिए दो साल का समय नहीं है।
भारत सरकार ने इस मुद्दे को राजनयिक स्तर पर उठाने के संकेत दिए हैं। विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि वे अमेरिकी विदेश विभाग (State Department) के साथ संपर्क में हैं ताकि वीजा प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया जा सके और विशेष रूप से कुशल पेशेवरों के लिए प्रतीक्षा समय कम किया जा सके।
“ट्रंप प्रशासन की नई आव्रजन नीतियां भारतीय पेशेवरों के लिए एक बड़ी बाधा साबित हो रही हैं। 2027 तक स्लॉट न होना एक अघोषित प्रतिबंध जैसा है।” — आप्रवासन विशेषज्ञ





